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एशिया-प्रशांत
19 Jun, 2026

अमेरिकी राजनयिक का बड़ा बयान, उत्तर कोरिया का परमाणु निरस्त्रीकरण ट्रंप प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता

अमेरिकी विदेश विभाग के उप सहायक सचिव डेविड विलेज़ोल ने स्पष्ट किया है कि ट्रंप प्रशासन ताकत के जरिए शांति की नीति अपनाते हुए उत्तर कोरिया के परमाणु निरस्त्रीकरण को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाए रखेगा।

सियोल, 19 जून।

अमेरिकी विदेश विभाग के उप सहायक सचिव डेविड विलेज़ोल ने साफ किया है कि उत्तर कोरिया का परमाणु निरस्त्रीकरण ट्रंप प्रशासन की प्रमुख प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर शामिल है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका की रणनीति का मुख्य केंद्र बिंदु यही मुद्दा है। एक खास मंच पर बोलते हुए उन्होंने संदेश दिया कि यदि उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन आगे आते हैं, तो अमेरिकी प्रशासन भी टेबल पर बैठकर बातचीत करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

हालांकि, विलेज़ोल ने यह भी स्पष्ट किया कि वाशिंगटन अपनी 'ताकत के माध्यम से शांति' की नीति पर अड्डों रहेगा। इसके तहत प्योंगयांग पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लागू रखे जाएंगे। साथ ही उसके साइबर हमलों और डिजिटल मुद्रा यानी क्रिप्टो करेंसी की चोरी जैसे अवैध कामों पर रोक लगाने के लिए सहयोगी देशों के साथ मिलकर काम किया जाएगा।

पिछले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई शिखर वार्ता में भी इस रुख पर सहमति बनी थी। हाल ही में फ्रांस में आयोजित बैठक में जी-7 देशों के बड़े नेताओं ने भी इसी प्रतिबद्धता को दोहराया है। दूसरी तरफ, उत्तर कोरिया ने परमाणु निरस्त्रीकरण की इन मांगों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। किम जोंग-उन की बहन किम यो-जोंग ने इसे एक ऐसी लक्ष्मण रेखा बताया है जिसे कभी पार नहीं किया जा सकता।

इसके अतिरिक्त, दक्षिण कोरिया को युद्धकालीन सैन्य नेतृत्व यानी ऑपरेशनल कंट्रोल सौंपने के संवेदनशील मुद्दे पर अमेरिकी राजनयिक ने राय रखी। उन्होंने बताया कि इस हस्तांतरण प्रक्रिया में अमेरिकी सैन्य कमांडरों की राय को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी और इसे बेहद सोच-समझकर आगे बढ़ाया जाएगा। सियोल को जहां साल 2028 के आखिर तक यह नियंत्रण मिलने की उम्मीद है, वहीं अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का मानना है कि इसके लिए जरूरी शर्तों को 2029 की पहली तिमाही तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

ऐतिहासिक रूप से दक्षिण कोरिया ने 1950-53 के युद्ध के दौरान अपनी सेना की कमान अमेरिका को सौंपी थी। साल 1994 में उसने शांति के समय का नियंत्रण तो वापस ले लिया था, पर युद्ध की स्थिति का कमान अब भी वाशिंगटन के पास है। इसके अलावा, विलेज़ोल ने सियोल में अमेरिकी कंपनियों के साथ होने वाले कथित भेदभावपूर्ण व्यवहार पर चिंता जताई। उनका इशारा वहां की बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी 'कूपैंग इंक' में हुए डेटा लीक मामले की तरफ था, जिसकी वजह से वह जांच के दायरे में आई है।

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