नई दिल्ली/मॉस्को, 12 सितंबर।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन में नाटो के यूरोपीय सदस्य देशों के सैनिकों की संभावित तैनाती को लेकर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय नाटो देश यदि यूक्रेन में अपनी सेना भेजते हैं तो रूस इसे सीधे सैन्य टकराव के रूप में देखेगा।
पुतिन ने यह बात शुक्रवार को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बातचीत में कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस यूरोपीय देशों को धमकी नहीं दे रहा है और न ही ऐसा करने की उसकी कोई योजना है।
रूसी राष्ट्रपति के अनुसार, कुछ यूरोपीय देश यूक्रेन में सैनिक भेजने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यूक्रेन में यूरोपीय नाटो देशों की सैन्य मौजूदगी संघर्ष को रूस और पश्चिम के बीच प्रत्यक्ष टकराव में बदल सकती है।
रूस पहले ही कह चुका है कि सुरक्षा गारंटी या शांति मिशन के नाम पर नाटो देशों की यूक्रेन में सैन्य तैनाती उसे स्वीकार्य नहीं होगी। पुतिन के बयान से इस मुद्दे पर रूस और पश्चिम के बीच तनाव बढ़ने की आशंका है।
यूरोप की राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों पर भी पुतिन ने पश्चिमी देशों के नेतृत्व की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि शीत युद्ध के बाद विदेश नीति, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था से जुड़े फैसलों में यूरोपीय नेताओं से कई ऐसी गलतियां हुईं, जिनका प्रभाव अब सामने आ रहा है।
उन्होंने दावा किया कि पश्चिमी नेतृत्व और वैश्विक अभिजात वर्ग को यह विश्वास हो गया था कि वे सत्ता और प्रभाव के सर्वोच्च स्तर तक पहुंच चुके हैं और उनसे गलतियां नहीं हो सकतीं।
पुतिन ने यूरोपीय देशों के आम नागरिकों में मौजूदा नीतियों को लेकर बढ़ते असंतोष का भी दावा किया। उन्होंने हाल के क्षेत्रीय चुनावों में दक्षिणपंथी दलों के बेहतर प्रदर्शन का हवाला देते हुए कहा कि लोगों की नाराजगी बढ़ रही है।
रूस लंबे समय से यूक्रेन को नाटो में शामिल करने की पश्चिमी कोशिशों और नाटो के पूर्व की ओर विस्तार को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा बताता रहा है। मॉस्को इन्हें यूक्रेन संघर्ष की प्रमुख वजहों में गिनता है।
वहीं, पश्चिमी देश रूस के इन दावों को खारिज करते हुए यूक्रेन की सुरक्षा और संप्रभुता के समर्थन की बात कहते हैं। इसी मतभेद के कारण यूक्रेन को लेकर रूस और पश्चिम के बीच तनाव बना हुआ है।
पुतिन ने आरोप लगाया कि यूक्रेन और उसके यूरोपीय समर्थक स्थायी समाधान की जगह संघर्ष को अस्थायी रूप से रोकना चाहते हैं। उनके अनुसार, इसका उद्देश्य यूक्रेनी सेना को दोबारा हथियार और संसाधन जुटाने का समय देना है।
ऐसे में यूक्रेन में नाटो सैनिकों की संभावित तैनाती का मुद्दा रूस और पश्चिम के बीच पहले से जारी तनाव को और बढ़ा सकता है।













