जैसे-जैसे पद और पदस्थापनाएं हो रही हैं, वैसे-वैसे दूरियां भी बढ़ती जा रही हैं। कभी ट्रेनिंग साथ में की, कुछ जिलों में भी साथ में रहे, यहीं परवान चढ़ी दोस्ती, लेकिन अब महीनों मिलना नहीं हो पा रहा है। पिछले दिनों एक वीवीआईपी ड्यूटी के दौरान मिलना तो हुआ, लेकिन सिर्फ नजरें मिल सकीं, क्योंकि दोनों कार्यक्रमों की दूरियां बहुत थीं।














