नई दिल्ली, 09 अक्टूबर।
कैंसर के उपचार को आर्थिक रूप से सुलभ बनाने के एक बड़े कदम के तहत केंद्र सरकार ने गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं के दाम सीमित करने का निर्णय लिया है। इसके तहत इन जीवनरक्षक औषधियों पर ट्रेड मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य के 30 प्रतिशत तक सीमित किया जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस नई पहल से चुनिंदा दवाओं के दामों में 70 प्रतिशत तक भारी गिरावट आने की संभावना है, जिससे देश भर के कैंसर रोगियों को सालाना लगभग 2,500 करोड़ रुपये की राहत मिलने का अनुमान है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) इस दायरे में आने वाली औषधियों की सूची को अंतिम रूप देकर जल्द ही आधिकारिक अधिसूचना जारी करेगा, जबकि बाजार में इन दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए निर्माताओं को सख्त निर्देश दिए गए हैं।
इससे पूर्व सरकार ने फरवरी 2019 में भी कुछ चुनिंदा कैंसर रोधी दवाओं के ट्रेड मार्जिन पर अंकुश लगाया था, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए थे और लगभग 984 करोड़ रुपये की वार्षिक बचत दर्ज की गई थी। इस बार के व्यापक दायरे में घरेलू, आयातित, पेटेंट और बिना पेटेंट वाली तथा जेनेरिक सभी प्रकार की कैंसर औषधियों को शामिल किया गया है। गौरतलब है कि खुले बाजार में कई गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं पर अत्यधिक मुनाफाखोरी देखी जाती थी, जहां ट्रेड मार्जिन औसतन 170 प्रतिशत और कुछ मामलों में 700 प्रतिशत तक पहुंच जाता था। इस प्रभावी मूल्य नियंत्रण नीति का मुख्य उद्देश्य मरीजों पर पड़ रहे भारी वित्तीय बोझ को कम करना और उच्च लागत के कारण इलाज से वंचित रहने वाले जरूरतमंदों को राहत प्रदान करना है।














