पुणे, 09 अक्टूबर।
भारतीय फिल्म जगत के एक युग का अंत करते हुए दिग्गज और लोकप्रिय अभिनेता नाना पाटेकर को पुणे के पास डोणजे स्थित उनके फार्महाउस पर पूरे शासकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। गोवा के डोना पावला स्थित अपने आवास पर दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया था, जहां उपचार के दौरान उनका निधन हो गया। उनके पार्थिव शरीर को विमान से पुणे लाया गया और डोणजे स्थित फार्महाउस पर दर्शन के लिए रखा गया, जहां उनके अंतिम दर्शन के लिए प्रशंसकों, नागरिकों और फिल्म जगत के साथ-साथ राजनीतिक हस्तियों का तांता लग गया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार सहित कई प्रमुख नेताओं और कलाकारों ने अपनी नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
वर्ष 1978 में फिल्म 'गमन' से अपने अभिनय सफर की शुरुआत करने वाले नाना पाटेकर ने 'परिंदा', 'क्रांतिवीर', 'अग्निसाक्षी', 'खामोशी', 'अपहरण' और 'नटसम्राट' जैसी फिल्मों में अपने बेजोड़ और दमदार अभिनय से दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी। उन्हें उनके शानदार अभिनय के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों और वर्ष 2013 में प्रतिष्ठित पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। अभिनय के अलावा उन्होंने 'नाम' फाउंडेशन के माध्यम से सूखाग्रस्त क्षेत्रों और किसानों की सहायता करके सामाजिक सरोकारों में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। आज भले ही उनके जाने से कला जगत में एक भारी शून्यता आ गई है, लेकिन उनकी सशक्त आवाज, बेमिसाल संवाद अदायगी और जीवंत किरदार हमेशा देशवासियों के दिलों में जीवंत रहेंगे।














