उज्जैन, 10 अक्टूबर।
मध्य प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के पारंपरिक वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान महाकाल की भस्म आरती संपन्न हुई। कपाट खुलने के बाद सबसे पहले गर्भगृह में विराजित सभी देवी-देवताओं का विधिवत पूजन किया गया और इसके पश्चात बाबा महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शहद, शक्कर तथा फलों के रस से तैयार पंचामृत से स्नान कराया गया। प्रथम घंटाल बजाकर भगवान को 'हरि ओम' का जल अर्पित करने के बाद उनका भव्य एवं दिव्य शृंगार किया गया। इस दौरान बाबा को रजत ॐ, बिल्वपत्र, रुद्राक्ष व चांदी के आभूषणों के साथ-साथ डमरू, शेषनाग और रजत मुंडमाल सुशोभित किए गए।
पूजन के अगले चरण में भगवान गणेश, माता पार्वती और कार्तिकेय की आराधना के बाद महामंडलेश्वर अखाड़े की ओर से भस्म अर्पित की गई, जिसके उपरांत भगवान निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। भस्म आरती के दौरान ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर यह अनुष्ठान पूरा किया गया, जिसके बाद बाबा को मिष्ठान और फलों का भोग लगाकर कपूर आरती उतारी गई। शनिवार के इस पावन अवसर पर मंदिर परिसर में देश के कोने-कोने से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने 'जय श्री महाकाल' के जयकारों के साथ दिव्य दर्शन किए और नंदी हॉल में पहुंचकर अपनी मनोकामनाएं निवेदित कीं।














