न्यूयॉर्क (अमेरिका), 12 अक्टूबर।
अमेरिका में नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन को अदालत से झटका लगा है। संघीय जिला न्यायाधीश जेनिफर एल. रोचोन ने सरकारी धन से तैयार उन टेलीविजन विज्ञापनों पर रोक लगाने का आदेश दिया है, जिनमें ट्रंप दिखाई दे रहे हैं। अदालत ने प्रशासन को ऐसे सभी शेष विज्ञापनों का प्रसारण रोकने का निर्देश दिया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्रशासन ने करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल राष्ट्रपति के राजनीतिक संदेश को बढ़ावा देने के लिए किया और कांग्रेस की मंजूरी से अधिक खर्च करके प्रचार संबंधी नियमों का उल्लंघन किया। यह मामला निगरानी संगठन कॉमन कॉज, गैर-लाभकारी संस्था डेमोक्रेसी फॉरवर्ड और अन्य पक्षों की ओर से उठाया गया था। सरकारी धन के इस तरह इस्तेमाल को लेकर अमेरिका में कई मुकदमे भी चल रहे हैं। इसी मुद्दे पर डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी ने भी वाशिंगटन की संघीय अदालत में अलग याचिका दायर की है।ट्रंप प्रशासन ने विज्ञापनों का बचाव करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य लोगों को कल्याणकारी योजनाओं और सरकारी नीतियों की जानकारी देना है। प्रशासन का तर्क है कि इससे पहले रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक, दोनों दलों की सरकारें सरकारी कार्यक्रमों के प्रचार के लिए सार्वजनिक धन खर्च करती रही हैं। मुकदमा सामने आने के बाद ट्रंप ने विज्ञापनों का खर्च स्वयं उठाने का वादा भी किया था, लेकिन व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि अब तक खर्च किए जा चुके लाखों डॉलर सरकार को लौटाने की कोई योजना नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने इन विज्ञापनों के लिए करदाताओं के धन से 20 मिलियन डॉलर यानी दो करोड़ डॉलर निर्धारित किए थे। यह राशि कांग्रेस द्वारा विभाग को आवंटित 175 मिलियन डॉलर के उस पैकेज से आई थी, जिसका इस्तेमाल ट्रंप प्रशासन के आव्रजन प्रवर्तन कार्यक्रमों के लिए किया जाना था। अदालत के आदेश को सरकारी धन के इस्तेमाल और राजनीतिक प्रचार के बीच अंतर तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।













