लखनऊ, 12 अक्टूबर।
उत्तर प्रदेश सरकार बलिया स्थित महर्षि भृगु आश्रम को धार्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने जा रही है। मुख्यमंत्री पर्यटन स्थलों के विकास योजना के तहत इस परियोजना पर 8.74 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मान्यता है कि सप्तऋषियों में प्रमुख महर्षि भृगु ने इसी तपोभूमि पर साधना की थी और भृगु संहिता की रचना की थी। राज्य सरकार का उद्देश्य आश्रम की ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और पौराणिक पहचान को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़ना है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश के धार्मिक स्थलों का विकास प्राथमिकता से किया जा रहा है। महर्षि भृगु आश्रम के कायाकल्प को मुख्यमंत्री की प्रमुख योजनाओं में शामिल बताया गया है। इससे पहले बलिया में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर भृगु कॉरिडोर विकसित करने की योजना भी सामने रखी गई थी। सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और देश-विदेश से आने वाले पर्यटक बलिया की सांस्कृतिक एवं पौराणिक विरासत से परिचित हो सकेंगे।
आश्रम के विकास के लिए परिसर में भव्य प्रवेश द्वार, दो मंजिला बहुउद्देशीय भवन, श्रद्धालुओं के लिए यात्री शेड, आकर्षक दीवार चित्रकारी और म्यूरल आर्ट के साथ आधुनिक संकेतक लगाए जाएंगे। महर्षि भृगु के जीवन और उनसे जुड़ी पौराणिक मान्यताओं को दर्शाने के लिए लाइट एंड साउंड शो की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। परियोजना के तहत आगंतुकों की मूलभूत जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सुविधाएं विकसित की जाएंगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महर्षि भृगु भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्र थे और उनके वंशज भार्गव कहलाते हैं। उनसे भृगु स्मृति, भृगु संहिता, भृगु सूत्र और भृगु उपनिषद जैसे ग्रंथों का संबंध बताया जाता है। प्रदेश सरकार का कहना है कि मुख्यमंत्री पर्यटन स्थलों के विकास योजना सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से धार्मिक, आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व वाले स्थानों को बेहतर पर्यटन सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है। इस परियोजना से आश्रम की पहचान को व्यापक बनाने के साथ क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।














