सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि इस अंतरिम राहत का अर्थ जांच पर रोक लगाना नहीं है। अदालत ने पंजाब सरकार और संबंधित पक्षों को जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश भी दिया।
पंजाब सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के पांच अक्टूबर के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से मिले इनपुट के आधार पर मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कथित तबादला-पदस्थापना और टेंडर भ्रष्टाचार मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया था। साथ ही, जांच एजेंसी को दो महीने के भीतर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया था।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर पंजाब और चंडीगढ़ में कई स्थानों पर छापेमारी कर चुकी है।
ट्रांसफर-पोस्टिंग और टेंडर में रिश्वत के आरोप
यह मामला ईडी की ओर से पंजाब पुलिस को भेजी गई गोपनीय जानकारी और व्हाट्सएप चैट से जुड़ा है। आरोप हैं कि मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े लोगों ने अधिकारियों के तबादलों और पदस्थापनाओं, टेंडर आवंटन तथा अनुकूल सरकारी नीतियां बनवाने के बदले रिश्वत ली।
पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि हाई कोर्ट ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत आवश्यक सरकारी मंजूरी के बिना सीधे प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया था। राज्य सरकार ने इसी आधार पर हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है।
फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को नोटिस जारी कर पंजाब सरकार की अपील पर जवाब मांगा है।














