संयुक्त राष्ट्र (न्यूयॉर्क), 13 अक्टूबर।
अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में यूनिसेफ की उप कार्यकारी निदेशक हनान सुलेमान ने भारत में बालिकाओं के सशक्तिकरण और शिक्षा के क्षेत्र में हुई उल्लेखनीय प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत में विश्व की सबसे बड़ी 25 करोड़ 30 लाख की किशोर आबादी निवास करती है, इसलिए यहां बेटियों के विकास के लिए उठाए गए कदमों का सकारात्मक प्रभाव वैश्विक स्तर पर दिखाई देता है। सुलेमान ने स्पष्ट किया कि निरंतर वित्तीय निवेश, व्यापक सामुदायिक भागीदारी और दूरदर्शी नीतियों के बल पर भारत ने समाज में बेटियों के प्रति सोच को बदला है। भारत और सिएरा लियोन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस मंच पर लाइबेरिया, अल्जीरिया और सिएरा लियोन के प्रतिनिधियों ने भी स्वीकार किया कि बालिकाओं के अवसरों में निवेश ही एक समृद्ध, शांतिपूर्ण और समावेशी दुनिया का आधार है।
कार्यक्रम के दौरान संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने अपने छात्र जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार उस्मानिया विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग कॉलेज में कभी लड़कियां नहीं होती थीं, जबकि आज वहां के कई संकायों में बालिकाओं की उपस्थिति 70 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग बालिकाओं की शिक्षा व शिक्षण सामग्री को बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने चिंता व्यक्त की कि तकनीक और एआई के उभरते क्षेत्र में अभी भी पुरुषों का दबदबा अधिक है, जिसे दूर करने के लिए वैश्विक स्तर पर ठोस प्रयास किए जाने आवश्यक हैं ताकि एआई और डिजिटल प्लेटफॉर्म बालिकाओं व महिलाओं के लिए अधिक अनुकूल बन सकें।













