नई दिल्ली, 13 अक्टूबर।
इन्फोसिस के सह-संस्थापक और परीक्षा सुधारों पर गठित उच्चस्तरीय कार्यबल के प्रमुख नंदन नीलेकणि ने मंगलवार को 'ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम 2026' के दौरान कहा कि प्रश्नपत्र लीक होने की गंभीर समस्या का समाधान आधुनिक प्रौद्योगिकी के जरिए व्यवस्थित रूप से संभव है। मई में नीट-यूजी परीक्षा रद्द होने और देशभर में हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों के बाद जुलाई में गठित इस समिति के अध्यक्ष नीलेकणि ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन सिफारिशों को लागू करने के लिए बेहद उत्सुक हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि पारंपरिक प्रश्नपत्रों के बजाय अंतिम समय में प्रश्नों के विशाल संग्रह से पेपर तैयार करने की व्यवस्था अपनाई जानी चाहिए।
तकनीक और एआई के प्रभावी इस्तेमाल पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) की मदद से परीक्षा के दिन ही प्रश्नपत्र तैयार किए जा सकते हैं, जिससे गड़बड़ी की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। इसके अलावा, समिति देश भर में करीब 1.5 लाख केंद्रों के मौजूदा नेटवर्क का विस्तार करके सभी मुख्य परीक्षाओं को पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित ऑनलाइन प्रारूप में बदलने के विकल्प पर भी गंभीरता से विचार कर रही है। आधार पहचान प्रणाली का सफल ढांचा तैयार कर चुके नीलेकणि ने विश्वास जताया कि बड़े पैमाने पर जनहितकारी तकनीकों को लागू करके परीक्षा प्रणाली की इस खामी को दूर किया जा सकता है।














