वॉशिंगटन डीसी, 14 अक्टूबर।
अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) को अमेरिका से आर्थिक मदद मिलने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोधी अमेरिकी दानदाताओं के माध्यम से संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके को पैसा भेज रहे हैं। मिलबेन के अनुसार, इस धन का इस्तेमाल भारत में अशांति फैलाने और सरकार के कामकाज में बाधा डालने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने सामाजिक माध्यम एक्स पर पोस्ट कर भारतीय युवाओं से अपनी आवाज उठाने और मोदी समर्थकों से एकजुट होने की अपील की।
मिलबेन ने आरोप लगाया कि कुछ अमेरिकी दानदाता दुनिया भर के दक्षिणपंथी नेताओं को निशाना बनाने के लिए एक खास तरीका अपनाते हैं। उनके मुताबिक, ऐसे लोग अमेरिका में पढ़े व्यक्तियों को चुनकर उन्हें कट्टर बनाते हैं और फिर अपने देश लौटने पर अराजकता फैलाने के लिए आर्थिक मदद देते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी 25 वर्षों से सार्वजनिक जीवन में हैं और 12 वर्षों से प्रधानमंत्री के रूप में कार्य कर रहे हैं। उनके अनुसार, मोदी अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे।
पहले भी मोदी सरकार का समर्थन कर चुकी हैं मिलबेन
मिलबेन ने फरवरी 2021 में किसान आंदोलन के दौरान कृषि कानूनों का समर्थन किया था। अगस्त 2023 में मणिपुर हिंसा के मुद्दे पर भी उन्होंने प्रधानमंत्री का बचाव किया। इसके अलावा, उन्होंने बीबीसी की वृत्तचित्र ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’ की आलोचना की थी और मार्च 2024 में नागरिकता संशोधन कानून लागू करने के फैसले की प्रशंसा की थी। लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने भारतीय मतदाताओं से मोदी को वोट देने की अपील भी की थी।
सीजेपी की फंडिंग पर पहले भी उठे सवाल
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने दीपके की अमेरिका में पढ़ाई के खर्च को लेकर सवाल उठाए थे। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी विपक्ष और सीजेपी पर विदेशी मदद के जरिए देश में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया था। अगस्त 2026 में सूचना के अधिकार कार्यकर्ता अमित तिवारी ने दीपके की पढ़ाई के खर्च और संगठन के कानूनी सहायता कोष की जांच की मांग की थी।
हालांकि, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके विदेशी फंडिंग के आरोपों को खारिज कर चुके हैं। उनका कहना है कि संगठन के आंदोलनों का खर्च वह और उनके दोस्त मिलकर उठाते हैं। उन्होंने किसी बाहरी दानदाता या बड़े उद्योगपति से आर्थिक मदद मिलने से इनकार किया था और जनसहयोग के माध्यम से धन जुटाने की योजना भी बताई थी।
दिल्ली प्रदर्शन पर हार्वर्ड के पूर्व छात्रों के अलग-अलग बयान
10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों के दो समूहों ने अलग-अलग बयान जारी किए। पहले समूह ने पुलिस पर प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार, गैरकानूनी हिरासत और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन के आरोप लगाए। 12 अक्टूबर को जारी इस बयान पर 100 पूर्व छात्रों ने हस्ताक्षर किए थे।
वहीं, बुधवार को जारी दूसरे बयान पर 44 लोगों ने हस्ताक्षर किए। इस समूह ने भारत की संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ कथित अभियान पर चिंता जताई और चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट, मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय तथा संसद के प्रति नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिशों का उल्लेख किया।














