वाशिंगटन, 15 अक्टूबर।
अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध में भारत में चल रहे युवाओं के नेतृत्व वाले ‘कॉकरोच’ आंदोलन को अमेरिका के कुछ दानदाताओं से आर्थिक सहायता मिल रही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके और उनके आंदोलन को यह मदद दी जा रही है। हालांकि, मिलबेन ने कथित वित्तीय सहायता देने वालों के नाम उजागर नहीं किए और न ही अपने दावों के समर्थन में कोई वित्तीय प्रमाण प्रस्तुत किया।
दिपके पहले ही विदेशी फंडिंग के आरोपों को खारिज कर चुके हैं। उनका कहना है कि आंदोलन से जुड़े आयोजक और उनके मित्र आपस में धन जुटाकर विरोध प्रदर्शनों का खर्च उठाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी का समर्थन करते हुए मिलबेन ने भारतीय युवाओं से आंदोलन के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए जवाबी आंदोलन जरूरी है। जून 2023 में मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान मिलबेन ने वाशिंगटन में भारतीय प्रवासियों के एक कार्यक्रम में भारत का राष्ट्रगान भी गाया था।
भारत में हाल के दिनों में मतदाता सूचियों में बदलाव के विरोध में प्रदर्शन हुए हैं। विपक्षी प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। वहीं, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने सीजेपी के नेताओं और विपक्षी नेताओं पर विदेशी ताकतों के इशारे पर देश को अस्थिर करने की कोशिश करने के आरोप लगाए हैं, लेकिन विदेशी फंडिंग संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस बीच, सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दास और सह-संयोजक आशुतोष रांका को बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। दोनों उन प्रदर्शनकारियों में शामिल थे, जिन्होंने मध्य दिल्ली के जंतर-मंतर में प्रवेश करने के लिए बैरिकेड पार किए थे। पुलिस ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए अधिकृत स्थलों की सूची से हटा दिया था। मामले में आंदोलन से जुड़े आरोपों और विदेशी वित्तीय सहायता के दावों को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।













