नई दिल्ली, 15 अक्टूबर।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एशियाई खेल 2026 में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने तिरंगे की शान बढ़ाई है। खिलाड़ियों की उपलब्धियां देश के करोड़ों लोगों के लिए गर्व का विषय हैं और युवा पीढ़ी को खेलों में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं।
गुरुवार को प्रधानमंत्री ने एशियाई खेलों में हिस्सा लेने वाले भारतीय दल से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने खिलाड़ियों की उपलब्धियों, महिला खिलाड़ियों के प्रदर्शन, खेल सुविधाओं के विस्तार और आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारियों पर चर्चा की।
महिला खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन
मोदी ने बताया कि भारत के कुल 85 पदकों में से 38 पदक महिला खिलाड़ियों ने जीते, जिनमें 11 स्वर्ण पदक शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन देश के लिए विशेष गर्व का विषय है। उचित अवसर, प्रशिक्षण और सुविधाएं मिलने पर भारतीय बेटियां अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी क्षमता साबित कर रही हैं।
प्रधानमंत्री ने महिला हॉकी टीम की ऐतिहासिक सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वर्ण पदक जीतकर टीम ने 44 साल का लंबा इंतजार समाप्त किया है। उन्होंने इसे भारतीय खेलों की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। पुरुष हॉकी टीम के स्वर्ण पदक, क्रिकेट में पुरुष और महिला टीमों की सफलता तथा कबड्डी में दोनों टीमों के स्वर्ण पदक जीतने की भी सराहना की। तीरंदाजी में पांच स्वर्ण पदक जीतने को उन्होंने महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
खेलों के लिए छह हजार करोड़ रुपये से अधिक का बजट
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार खेलों के विकास और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए लगातार काम कर रही है। खेल क्षेत्र के लिए छह हजार करोड़ रुपये से अधिक का बजट आवंटित किया गया है। टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना और खेलो इंडिया जैसी पहलों के माध्यम से प्रशिक्षण तथा प्रतियोगिताओं की तैयारी पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि खेल प्रतिभाओं की पहचान केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। छोटे शहरों, कस्बों और गांवों में भी खिलाड़ियों को अवसर और बेहतर प्रशिक्षण मिलना जरूरी है। पांच से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों की प्रतिभा पहचानकर उन्हें समय पर मार्गदर्शन देने से भविष्य के खिलाड़ी तैयार किए जा सकते हैं।
ओलंपिक 2028 और 2036 की तैयारी पर जोर
मोदी ने खिलाड़ियों से लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028, भारत में 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों और 2036 ओलंपिक की मेजबानी की आकांक्षा को ध्यान में रखते हुए अभी से तैयारी करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, खेल महासंघों और सरकार को मिलकर काम करना होगा।
प्रधानमंत्री ने खेलों को जनभागीदारी से जोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास और टीम भावना भी विकसित करते हैं। उनका संदेश है—“जो खेलेगा, वो खिलेगा।”
उन्होंने खिलाड़ियों से अपने अनुभव नई पीढ़ी के साथ साझा करने और उभरती प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की अपील की। मोदी के अनुसार, खेलों का विस्तार प्रशिक्षण, फिटनेस और खेल प्रबंधन सहित विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार तथा करियर के नए अवसर भी पैदा कर रहा है।














