ऐसा नहीं है कि साहब को सरकारी बंगला नहीं मिल रहा है। साहब लंबे समय से मैस में ही विराजमान हैं। लगभग एक वर्ष होने को है। साहब मैस के रूम से निकलकर नाश्ता, लंच, डिनर एवं चाय-कॉफी का आनंद ले रहे हैं। अब तो मैस के स्टाफ ने भी साहब को अपना स्थायी कस्टमर मान लिया है।














