जौनपुर, 17 अक्टूबर।
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के जफराबाद क्षेत्र स्थित कबुलपुर बाजार में शुक्रवार रात श्री दया नारायण लीला समिति के कलाकारों ने नारद मोह प्रसंग का मंचन किया। रात 9 बजे शुरू हुई लीला मध्यरात्रि तक चली, जिसमें नारद मुनि के अहंकार और उसके अंत की कथा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। मंचन के दौरान दिखाया गया कि नारद मुनि की कठोर तपस्या से इंद्र का सिंहासन विचलित होने लगा। तपस्या भंग करने के लिए इंद्र ने पहले अपने गणों और फिर कामदेव को भेजा, लेकिन सभी असफल रहे। इसके बाद नारद मुनि भगवान विष्णु के पास पहुंचे और उनसे हरि जैसा रूप मांगा। वरदान मिलने के बाद वे स्वयंवर में पहुंचे, जहां उनके वानर रूप को देखकर राजा हंसने लगे। इससे नारद क्रोधित हो गए और उन्होंने भगवान विष्णु को श्राप दे दिया।

आगे की लीला में सच्चाई सामने आने पर नारद मुनि को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने भगवान विष्णु से क्षमा मांगी। कलाकारों ने इस प्रसंग के जरिए संदेश दिया कि अहंकार व्यक्ति की समझ और विवेक को प्रभावित करता है, जबकि सच्चाई का पता चलने पर अपनी भूल स्वीकार करना जरूरी है। मंचन में नारद की भूमिका जानकी, इंद्र की ज्ञानेश श्रीवास्तव, कामदेव की अजय वनवंशी, भगवान विष्णु की सूरज श्रीवास्तव और विश्वमोहिनी की भूमिका आदित्य ने निभाई। जागरूक के रूप में अशोक गुप्ता, संतरी के रूप में मोनू गुप्ता और आनंदी की भूमिका में शिवेंद्र श्रीवास्तव रोमी ने अभिनय किया। कार्यक्रम में योगेश श्रीवास्तव, प्रदीप श्रीवास्तव, संजय यादव, पिंटू श्रीवास्तव, भूपेश श्रीवास्तव, कमर आरिफ खान, प्रेमचंद्र मोदनवाल और राम आसरे मिश्रा सहित कई लोग उपस्थित रहे।















