नई दिल्ली, 17 अक्टूबर।
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को सीने में संक्रमण के कारण दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, 98 वर्षीय आडवाणी की हालत स्थिर है और चिकित्सकों की टीम उनकी निगरानी कर रही है।
आडवाणी को शुक्रवार शाम करीब 7:30 बजे अस्पताल लाया गया था। उन्हें फुफ्फुस रोग विभाग में भर्ती किया गया है। फिलहाल उनकी चिकित्सकीय जांच की जा रही है और उपचार जारी है।
पिछले कुछ महीनों में यह दूसरी बार है, जब उन्हें स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के चलते अस्पताल में भर्ती करना पड़ा है। इससे पहले इसी साल मई में उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उन्हें अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कुछ दिनों तक चिकित्सकीय देखरेख में रहने के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई थी।
दिसंबर 2024 में भी आडवाणी को इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल की गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती किया गया था। उस समय उनकी जांच और उपचार किया गया था। न्यूरोलॉजिस्ट की देखरेख में उनका इलाज चला था। अस्पताल ने तब भी उनकी स्थिति स्थिर बताई थी।
17 दिसंबर 2024 को उनकी सेहत में धीरे-धीरे सुधार होने की जानकारी दी गई थी। उस समय अगले एक से दो दिनों में उन्हें गहन चिकित्सा इकाई से बाहर स्थानांतरित किए जाने की संभावना जताई गई थी।
लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को कराची में हुआ था, जो वर्तमान में पाकिस्तान का हिस्सा है। भारतीय जनता पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कई बार पार्टी अध्यक्ष का दायित्व संभाला और देशभर में संगठन का विस्तार करने में योगदान दिया।
1990 में निकाली गई उनकी राम रथ यात्रा भारतीय राजनीति का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बनी। इस यात्रा से भाजपा की राजनीतिक पहुंच बढ़ाने में मदद मिली। आडवाणी ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार में 2002 से 2004 तक देश के उपप्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने गृह मंत्रालय समेत कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी भी संभाली।
सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान के लिए वर्ष 2024 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। इससे पहले वर्ष 2015 में उन्हें पद्म विभूषण प्रदान किया गया था। आडवाणी भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और पार्टी के राजनीतिक इतिहास में उनका महत्वपूर्ण स्थान रहा है।














