वाशिंगटन, 17 अक्टूबर।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध, शुल्क और अन्य पाबंदियां लागू करने के प्रावधानों में छूट देने का फैसला किया है। उन्होंने इसे अमेरिका के राष्ट्रीय हित में उठाया गया कदम बताते हुए इस संबंध में कांग्रेस को प्रमाणपत्र सौंपने की जानकारी दी।
शुक्रवार रात जारी कार्यकारी आदेश में ट्रंप ने कहा कि फिलहाल रूस और ईरान से संबंधित कानून के तहत कुछ प्रतिबंधों को लागू नहीं करना अमेरिकी हित में है। उन्होंने ग्राहम अधिनियम के अंतर्गत निर्धारित शुल्क, पाबंदियों और प्रतिबंधों से छूट देने की घोषणा की।
लिंडसे ओ. ग्राहम के नाम पर बने इस कानून के तहत ट्रंप को रूस पर व्यापक प्रतिबंध लगाने और रूसी तेल व गैस के प्रमुख खरीदार देशों पर भारी आयात शुल्क लगाने का अधिकार दिया गया है। इसमें चीन और भारत जैसे देश भी शामिल हैं।
अमेरिकी कांग्रेस ने 16 सितंबर को इस विधेयक को पारित किया था और ट्रंप ने दो दिन बाद इसे कानून का रूप दिया। इसके प्रावधानों के अनुसार, कानून लागू होने के 30 दिनों के भीतर रूस से सबसे अधिक कच्चा तेल या गैस आयात करने वाले पांच प्रमुख देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जा सकता है।
हालांकि, इस कानून की धारा 115 में राष्ट्रपति को राष्ट्रीय हित के आधार पर प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्क से छूट देने का अधिकार भी दिया गया है। ट्रंप ने इसी प्रावधान का इस्तेमाल करते हुए कानून की धाराओं 112 और 113 के तहत निर्धारित शुल्कों से छूट देने की बात कही है। धारा 113 में रूसी कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने अथवा प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का प्रावधान है।
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब कुछ दिन पहले ही ट्रंप ने रूस के साथ अमेरिका और वैश्विक बाजारों के लिए डीजल आपूर्ति को लेकर समझौता किया था। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा से कुछ दिन पहले लिए गए इस निर्णय को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पिछले महीने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रुबियो के साथ बैठक में ग्राहम अधिनियम को लेकर भारत की चिंताएं रखी थीं। उन्होंने बताया था कि भारत की तेल रिफाइनरियां मुख्य रूप से मध्यम श्रेणी के सल्फरयुक्त कच्चे तेल के प्रसंस्करण के अनुरूप तैयार की गई हैं। इसकी आपूर्ति पश्चिम एशिया के देशों और रूस से होती है।
जयशंकर ने यह भी बताया था कि वेनेजुएला से मिलने वाला कच्चा तेल अधिक भारी श्रेणी का है, जबकि अमेरिका का तेल हल्की श्रेणी का है। भारतीय रिफाइनरियों में इस्तेमाल से पहले अमेरिकी तेल को दूसरे प्रकार के तेल के साथ मिलाना आवश्यक होगा।
ईरान युद्ध के कारण पश्चिम एशिया से तेल की आपूर्ति प्रभावित होने के बीच भारत अपनी अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करने के लिए रूसी कच्चे तेल पर निर्भर है। ऐसे में अमेरिकी प्रतिबंधों और शुल्कों में छूट का फैसला भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है।













