बेंगलुरु, 17 अक्टूबर।
कर्नाटक की राजनीति में फिर वही पुरानी कहानी लौट आई है, जहां दुश्मन बाहर नहीं, बल्कि भीतर बैठा है। कैमरा छिपा है और हर बात रिकॉर्ड हो रही है। इस बार स्टिंग की आंधी ने सत्ता के गलियारों को हिला दिया है। आरोप है कि अपने ही लोग अपने ही नेताओं का वीडियो बना रहे हैं और उसे हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। यह लड़ाई अब विचारधारा की नहीं, बल्कि अस्तित्व की बन गई है।
स्टिंग का खेल समझना जरूरी है। यह केवल एक वीडियो नहीं, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक युद्ध है। जैसे ही कोई कथित वीडियो सामने आता है, जनता सच जाने बिना ही फैसला सुना देती है। अदालत का फैसला तो वर्षों बाद आता है, लेकिन राजनीति में वीडियो का फैसला कुछ घंटों में हो जाता है।
कर्नाटक में एक पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ ऐसा ही कथित वीडियो प्रसारित करने की कोशिश हुई है, जिसके बाद उन्होंने अदालत की शरण ली और अदालत ने उस विवादित सामग्री के प्रचार पर रोक लगा दी। साथ ही पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई गई है। लेकिन सवाल यह है कि यह वीडियो बनाया किसने?
एक करीबी विधायक का दावा है कि इसके पीछे वही लोग हैं, जो पहले एक पूर्व मंत्री के सीडी कांड के पीछे थे। उस समय एक मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था। अब फिर वही तरीका अपनाया जा रहा है। इसका मतलब है कि स्टिंग एक आदत बन चुका है।
कर्नाटक की राजनीति में सत्ता के कई दावेदार हैं। एक कुर्सी और कई दावेदार। जब बाहर से लड़ना मुश्किल होता है, तो भीतर से ही वार किया जाता है। इसका सबसे आसान तरीका है, नैतिकता के नाम पर हमला करो, वीडियो लाओ और कहो कि देखो, यह नेता नैतिक नहीं है। फिर उसी बहाने इस्तीफा मांगो। यह तरीका पुराना है, लेकिन कारगर है, क्योंकि इसमें विरोधी दल को कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ती। सत्तारूढ़ दल खुद ही अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार लेता है।
एक विधायक ने तो खुलकर कहा है कि जब वह खुद मंत्रिमंडल में था, तब भी उसका स्टिंग करने की कोशिश हुई थी। इससे पता चलता है कि यह लड़ाई सत्ता के लिए ही नहीं, बल्कि वर्चस्व के लिए भी है।
इसी बीच सियासी पारा तब और चढ़ गया, जब विपक्षी दल के प्रदेश अध्यक्ष ने दावा किया कि चुनाव आते ही सत्तारूढ़ दल के पच्चीस विधायक, जिनमें कैबिनेट मंत्री भी शामिल हैं, उनके साथ आ जाएंगे। यह बयान सुनने में फिल्मी लगता है, लेकिन कर्नाटक में ऐसा पहले भी हो चुका है। कुछ साल पहले सत्रह विधायकों के इस्तीफे ने पूरी सरकार गिरा दी थी। इसलिए पच्चीस का आंकड़ा लोगों को चौंकाता नहीं है।
इस दावे के पीछे दो रणनीतियां हैं। पहली, सत्तारूढ़ दल में डर पैदा करना। जब किसी विधायक को लगेगा कि उसके ही साथी उसकी जासूसी कर रहे हैं, तो वह असुरक्षित महसूस करेगा और विकल्प तलाशने लगेगा। दूसरी, जनता में यह संदेश देना कि सत्तारूढ़ दल में सब कुछ ठीक नहीं है।
मुख्यमंत्री ने इस पर पलटवार करते हुए कहा है कि अगर इतना ही भरोसा है, तो उन नेताओं को अभी अपनी पार्टी में शामिल कर लेना चाहिए। चुनाव का इंतजार क्यों? यह बयान बताता है कि सत्ता पक्ष इस दावे को चुनौती के रूप में ले रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम में अब दो नए मोड़ आ गए हैं। पहला अदालत का और दूसरा जांच एजेंसी का। अदालत ने एक नेता की याचिका पर विवादित सामग्री के प्रसार पर रोक लगा दी है, जो बड़ी राहत है। वहीं, केंद्रीय नेतृत्व की ओर से पूरे मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि वह किसी भी जांच के लिए तैयार हैं और सारे दस्तावेज देने को भी तैयार हैं। उन्होंने कहा कि जांच की मांग हो रही है, यह अच्छी बात है। हम जवाब देंगे। यह बयान बताता है कि सत्तापक्ष इस मामले का सामना करने को तैयार है।
इस सारे शोर में सबसे ज्यादा नुकसान कर्नाटक की जनता का हो रहा है। जो राज्य कभी बेंगलुरु की तकनीक और मैसूर की संस्कृति के लिए जाना जाता था, आज वह स्टिंग और दल-बदल के लिए चर्चा में है। विधानसभा में विकास, बेरोजगारी और किसानों के मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए, लेकिन चर्चा इस बात की हो रही है कि किसका वीडियो किसके पास है।
यह लोकतंत्र के लिए सबसे खतरनाक स्थिति है। जब राजनीति कैमरे में कैद होने लगे, तो जनता का भरोसा टूटने लगता है। लोग सोचने लगते हैं कि सभी एक जैसे हैं और फिर वे मतदान से भी दूर होने लगते हैं। यही वह स्थिति है, जिसका फायदा उठाकर कुछ लोग सत्ता हथियाना चाहते हैं।
कर्नाटक में स्टिंग की हवा फिर बह रही है। अपने ही अपनों को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं और दो दर्जन से ज्यादा विधायकों के पाला बदलने का दावा किया जा रहा है। लेकिन इतिहास गवाह है कि कर्नाटक की जनता बहुत समझदार है। वह स्टिंग के आधार पर नहीं, बल्कि काम के आधार पर फैसला करती है। जो दल कैमरे की राजनीति से बाहर निकलकर जनता के मुद्दों पर आएगा, वही जीत की ओर बढ़ेगा। बाकी सब कैमरे के धुंधलके में खोकर रह जाएंगे।














