भोपाल, 17 अक्टूबर।
भोपाल हो या इंदौर, जबलपुर हो या ग्वालियर, हर शहर की सीमा पर एक ही कहानी दिखती है। खेतों के बीच अचानक बोर्ड लग जाता है, नई कॉलोनी बुक करें, सस्ते प्लॉट। देखते ही देखते खेत छोटे-छोटे भूखंडों में बंट जाता है। वहां न सड़क होती है, न बिजली, न पानी और न सीवर। फिर भी लोग मकान बना लेते हैं, क्योंकि उन्हें बताया जाता है कि कॉलोनी जल्द वैध हो जाएगी। यह कारोबार प्रशासन की निगाहों के सामने फलता-फूलता है।
क्या नगर निगम को पता नहीं चलता कि उसके वार्ड में नई कॉलोनी काटी जा रही है? क्या जिला प्रशासन को कृषि भूमि पर हो रही प्लॉटिंग की खबर नहीं लगती? क्या नगर तथा ग्राम निवेश विभाग सो रहा है? अवैध निर्माण रोकने की जिम्मेदारी जिन विभागों की है, उनकी निष्क्रियता पर सवाल उठते रहे हैं। समय पर कार्रवाई नहीं होने से अवैध कॉलोनाइजरों के हौसले बढ़ते हैं। नोटिस जारी होते हैं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई के अभाव में प्लॉट बिकते रहते हैं।
इस पूरे खेल में सबसे ज्यादा नुकसान उस आम आदमी का होता है, जो जिंदगी भर की कमाई लगाकर छोटा-सा प्लॉट खरीदता है। वह किराए के मकान से मुक्ति पाने और अपने परिवार को छत देने का सपना देखता है। पत्नी के गहने बेचकर या कर्ज लेकर प्लॉट खरीदता है और धीरे-धीरे मकान बनाता है। बाद में पता चलता है कि कॉलोनी अवैध है। वहां सड़क, पानी, बिजली और जल निकासी जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। फिर उसे सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
गलती प्रशासन की लापरवाही की हो और सजा आम आदमी भुगते, यह कैसी व्यवस्था है? अवैध कॉलोनियों के कारोबार में केवल कॉलोनाइजर ही नहीं, बल्कि संबंधित अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जब खेतों में सड़कें बन रही थीं और प्लॉट बिक रहे थे, तब जिम्मेदार विभाग कहां थे? कार्रवाई के नाम पर केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं है। दोषी अधिकारियों और संरक्षण देने वालों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
प्रदेश में 7,981 अवैध कॉलोनियां चिन्हित होने के बावजूद अद्यतन आंकड़ों और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत बनी हुई है। सरकार को ड्रोन सर्वे कराकर सभी कॉलोनियों का नया रिकॉर्ड तैयार करना चाहिए। उनकी जियो टैगिंग कर जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाए, ताकि प्लॉट खरीदने से पहले नागरिक उसकी वैधता जांच सकें। पुराने आंकड़ों के आधार पर नई व्यवस्था बनाना पर्याप्त नहीं होगा। नई और पुरानी, सभी अवैध कॉलोनियों की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
यदि सरकार वास्तव में सुधार चाहती है, तो जिम्मेदारी तय करनी होगी। अवैध कॉलोनी विकसित होने पर संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई की जाए। नियम बनाने में देरी दूर कर पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए। आम आदमी की जिंदगी भर की कमाई बचानी है, तो केवल कॉलोनाइजर नहीं, उसे संरक्षण देने वाले पूरे तंत्र की जवाबदेही तय करनी होगी। अन्यथा लोग घर का सपना देखेंगे और हर बरसात में उनका सपना कीचड़ में डूबता रहेगा।













