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संपादकीय
17 Oct, 2026

मेरे सपनों का घर अब छोटा लगने लगा है: तीन दिन में 1600 घरों ने बदली चाबी, यह केवल आंकड़ा नहीं, दिल की बात है

नवरात्र के शुरुआती तीन दिनों में भोपाल में 1,632 रजिस्ट्रियों के साथ बड़े घरों की बढ़ती मांग, रीसेल संपत्तियों और आसान पंजीकरण प्रक्रिया का रुझान सामने आया।

भोपाल, 17 अक्टूबर।

भोपाल की गलियों में इन दिनों एक ही चर्चा है। नवरात्र आते ही रजिस्ट्री दफ्तरों में भीड़ क्यों बढ़ गई? तीन दिन में 1632 परिवारों ने अपने पुराने घर की चाबी किसी और को दी और नए घर की चाबी अपने हाथ में ली। यह केवल सरकारी आंकड़ा नहीं, हर उस मध्यमवर्गीय परिवार के दिल की धड़कन है, जो सालों से सोच रहा था कि कब उसका भी बड़ा घर होगा।

पहले नवरात्र में लोग बाजार से छोटी-सी मूर्ति लाते थे, अब लोग अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि, अपना घर खरीद रहे हैं। यह बदलाव बताता है कि भोपाल का आम आदमी अब केवल त्योहार नहीं मना रहा, बल्कि अपना भविष्य भी बुन रहा है।

आप किसी भी कॉलोनी में चले जाइए, हर दूसरा व्यक्ति यही कहता मिलेगा कि उसका पुराना घर अब छोटा पड़ने लगा है। कभी इसी 400 वर्गफीट के मकान में माता-पिता ने बड़े अरमानों से गृह प्रवेश किया था। इसी घर में बच्चों ने पहला कदम रखा था। लेकिन आज बच्चे बड़े हो गए हैं। उन्हें पढ़ाई के लिए अलग कमरा चाहिए, नौकरी के लिए लैपटॉप रखने की जगह चाहिए और घर में कार खड़ी करने की जगह भी चाहिए।

400 से 600 वर्गफीट वाला मकान बेचने में दर्द भी है और खुशी भी। दर्द इस बात का कि जहां बचपन बीता, उसे छोड़ना पड़ रहा है। खुशी इस बात की कि अब 800 से 1200 वर्गफीट के घर में परिवार खुलकर सांस ले सकेगा। यह बदलाव मजबूरी से ज्यादा अपने परिवार को बेहतर सुविधाएं देने की चाहत का परिणाम है।

पिछले दस से बारह वर्षों में परिवार की परिभाषा बदल गई है। पहले एक कमरे में तीन भाई सो जाते थे, अब हर किसी को अपना कमरा चाहिए। पहले एक आंगन में पूरा परिवार साथ बैठता था, अब हर किसी को अपनी निजता चाहिए। वाहन से लेकर रहन-सहन तक, सबकी जरूरतें बढ़ गई हैं। इसलिए पुराने घर में जगह की कमी महसूस होने लगी है।

पहले लोग शुभ मुहूर्त देखकर घर खरीदने की योजना बनाते थे, लेकिन इस बार नवरात्र के शुरुआती तीन दिनों में ही 1632 रजिस्ट्रियां हो गईं। ई-रजिस्ट्री और वीडियो केवाईसी की सुविधा ने भी प्रक्रिया आसान बनाई है। तीन दिनों में 216 लोगों ने वीडियो के माध्यम से अपनी पहचान सत्यापित कराई। इससे लोगों को दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिली है।

आंकड़ों के अनुसार, 45 प्रतिशत से अधिक मकान रीसेल वाले हैं। इसका अर्थ है कि एक व्यक्ति अपना पुराना घर बेचकर बड़ा घर खरीद रहा है, जबकि दूसरा उसी मकान को अपना पहला घर बना रहा है। यह एक ऐसी कड़ी है, जिसमें किसी की विदाई दूसरे के नए सफर की शुरुआत बनती है।

इस पूरी कहानी का सबसे सुंदर पहलू यह है कि भोपाल का आदमी आज भी अपनी मिट्टी पर भरोसा करता है। वह अपने बच्चों के भविष्य के लिए एक कमरा और जोड़ना चाहता है। घर केवल दीवारें नहीं, एहसास है। तीन दिन में 1632 रजिस्ट्रियां केवल संख्या नहीं, बल्कि उन परिवारों की आंखों की चमक हैं, जिन्हें अब थोड़ा और खुला आसमान मिलेगा। नवरात्र के इस पर्व पर अपने घर को बड़ा करना भी परिवार के सुख और बेहतर भविष्य की कामना का प्रतीक बन गया है।

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