नई दिल्ली, 17 अक्टूबर।
इंटरनेट पर बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री को पूरी तरह रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने केंद्र सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से ऐसी आपत्तिजनक सामग्री को चिन्हित कर तुरंत हटाने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार किया जाए। न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने साल 2024 में जारी अपने पिछले आदेशों के बावजूद इंटरनेट पर ऐसी सामग्री की लगातार मौजूदगी पर गहरी चिंता जताई है।
शीर्ष अदालत ने यह रेखांकित किया कि केवल तकनीकी उपाय और डिजिटल सुरक्षा तंत्र इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए काफी नहीं हैं। बच्चों को सुरक्षित इंटरनेट उपयोग और डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए पाठ्यक्रम में आयु-अनुकूल डिजिटल सुरक्षा शिक्षा को अनिवार्य रूप से शामिल करने का सुझाव दिया गया है। NCERT और राज्यों की शैक्षिक परिषदें बाल मनोवैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और अभिभावक विशेषज्ञों के साथ मिलकर यह शैक्षणिक सामग्री तैयार करेंगी।
इस व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा विधि एवं न्याय मंत्रालय को मिलकर जरूरी दिशानिर्देश, SOP और IT नियमों में संशोधन करने का आदेश मिला है। केंद्र सरकार को 10 दिसंबर 2026 की अगली सुनवाई तक इन निर्देशों के क्रियान्वयन की प्रगति रिपोर्ट शपथ पत्र के माध्यम से अदालत में प्रस्तुत करनी होगी।














