उज्जैन, 19 अक्टूबर।
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के आश्विन शुक्ल नवमी के अवसर पर भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का देवी स्वरूप में मनोहारी शृंगार किया गया। सुबह चार बजे मंदिर के कपाट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में विराजित देवी-देवताओं का पूजन किया और बाबा महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक कर वैदिक मंत्रों के साथ पूजा-अर्चना की गई। प्रथम घंटाल बजने पर मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया और हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग पर भांग, चंदन और त्रिपुंड लगाया गया। फिर वस्त्र से ढंककर भगवान को भस्म अर्पित की गई। इस धार्मिक अनुष्ठान में महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भस्म चढ़ाई गई। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल भक्तों को साकार स्वरूप में दर्शन देते हैं।
भस्म आरती के बाद बाबा महाकाल को चांदी के आभूषण, शेषनाग का रजत मुकुट, चांदी की मुंडमाला और रुद्राक्ष की माला धारण कराई गई। मोगरा और गुलाब सहित सुगंधित पुष्पों से भगवान का अलंकरण किया गया। फल और मिष्ठान का भोग लगाने के बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन हुए। दिव्य शृंगार में सजे भगवान महाकाल के दर्शन के लिए सुबह से ही बड़ी संख्या में भक्त मंदिर पहुंचे। आरती के दौरान मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा और श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। दर्शन के बाद कई भक्तों ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान में अपनी मनोकामनाएं भी कहीं। महानवमी पर हुए इस विशेष पूजन और शृंगार ने मंदिर में श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना दिया।














