कोलकाता, 19 अक्टूबर।
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में 17 अक्टूबर की शाम भगदड़ मचने से 19 लोगों की मौत और 25 लोगों के घायल होने की खबर है। सप्तमी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पंडाल में मौजूद थे। शुरुआती जांच के अनुसार, बारिश, सीमित प्रवेश और निकास मार्गों तथा भीड़ प्रबंधन में कथित लापरवाही के कारण स्थिति बिगड़ गई। पंडाल की संरचना गिरने की आशंका जताने वाली एक घोषणा से भी लोगों में अफरा-तफरी फैलने की बात सामने आई है। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और 18 अक्टूबर तक सात लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें पूजा आयोजन समिति तथा पंडाल निर्माण, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन से जुड़े लोग शामिल बताए गए हैं। अदालत ने आरोपितों को 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। पुलिस सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर घटना के कारणों तथा संभावित लापरवाही की जांच कर रही है।
राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। घायलों को पांच-पांच लाख रुपये की सहायता तथा उनके इलाज का खर्च उठाने की भी बात कही गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृतकों के निकट परिजनों के लिए दो-दो लाख रुपये और घायलों के लिए 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि घोषित की है। घटना की जांच के लिए विशेष व्यवस्था और उच्च न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित करने का प्रस्ताव भी सामने आया है। हादसे के बाद पुलिस ने संबंधित पंडाल बंद कर दिया और आसपास के इलाकों में भीड़ जुटने पर प्रतिबंध लगाए। अन्य दुर्गा पूजा आयोजनों में भी सुरक्षा, प्रवेश-निकास व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण की समीक्षा की जा रही है। 19 अक्टूबर तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मामले में जांच जारी थी और हादसे के लिए जिम्मेदारी तय होना बाकी था।














