भोपाल, 21 अक्टूबर।
मध्यप्रदेश अब केवल देश का मध्यवर्ती प्रदेश नहीं रहा, बल्कि विकास का केंद्र बनने की तैयारी में है। सरकार ने जबलपुर, भोपाल और इंदौर के बीच मौजूदा सड़कों के किनारे औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करने का फैसला लिया है। इस पर सौ करोड़ रुपये की शुरुआती राशि से काम शुरू होगा और आने वाले तीन वर्षों में तीन लाख करोड़ रुपये तक निवेश का लक्ष्य रखा गया है। यह केवल सड़क किनारे उद्योग लगाने की योजना नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के सर्वांगीण विकास का नया नक्शा है।
इस गलियारे से छह लाख युवाओं को रोजगार मिलने की बात कही गई है। यह आंकड़ा केवल संख्या नहीं, बल्कि छह लाख परिवारों के सपनों से जुड़ा है। आज मध्यप्रदेश का युवा पढ़-लिखकर नौकरी के लिए भटकता है। यदि उसके घर के पास ही उद्योग लगें, तो उसे रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। सरकार का लक्ष्य पहले वर्ष में एक लाख करोड़ रुपये का निवेश लाना और धीरे-धीरे इसे तीन लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। उद्योगों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर पैदा होंगे। कारखाने लगेंगे तो परिवहन, व्यापार और सेवाओं से जुड़े लोगों की आमदनी भी बढ़ेगी।
जबलपुर में रक्षा और इंजीनियरिंग, भोपाल में प्रशासन और तकनीक तथा इंदौर में व्यापार और उद्यमिता की मजबूत संभावनाएं हैं। औद्योगिक कॉरिडोर इन तीनों शहरों की क्षमताओं को एक साथ जोड़ सकता है। उद्योगों के सड़क के नजदीक स्थापित होने से परिवहन लागत घटेगी और माल तेजी से बाजार तक पहुंचेगा। इससे कृषि उत्पादों को भी प्रसंस्करण इकाइयों तक पहुंचाना आसान होगा।
सरकार ने तीस दिनों में एक विशेष कंपनी के गठन की योजना बनाई है। मुख्यमंत्री इसके अध्यक्ष होंगे। सरकार जमीन उपलब्ध कराएगी और कंपनी भूमि की पहचान, प्रबंधन, अर्जन तथा विकास का काम करेगी। इससे औद्योगिक परियोजनाओं की मंजूरी और क्रियान्वयन में तेजी आने की उम्मीद है।
इस कॉरिडोर में छोटे और मझोले उद्योगों को भी पर्याप्त जगह मिलनी चाहिए। खाद्य प्रसंस्करण, टेक्सटाइल, ऑटो पार्ट्स और आईटी हार्डवेयर जैसे क्षेत्रों में निवेश से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल सकता है। कौशल प्रशिक्षण केंद्रों को इन उद्योगों से जोड़ने पर युवाओं को रोजगार के लिए बेहतर तैयारी का अवसर मिलेगा।
किसानों के लिए भी यह कॉरिडोर लाभकारी साबित हो सकता है। सड़क किनारे खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां और कोल्ड स्टोरेज बनने से किसान अपने उत्पाद सीधे उद्योगों को बेच सकेंगे। इससे कृषि और उद्योग के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा।
हालांकि, निवेश आकर्षित करने के लिए केवल जमीन और सड़क पर्याप्त नहीं हैं। निर्बाध बिजली, पर्याप्त पानी, बेहतर इंटरनेट, परिवहन सुविधाएं, श्रमिकों के लिए आवास और ट्रक चालकों के लिए विश्राम स्थल भी जरूरी हैं। बुनियादी सुविधाएं मजबूत होंगी, तभी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।
यह कॉरिडोर केवल उद्योगों का गलियारा नहीं, बल्कि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर जीवन स्तर की संभावनाओं का रास्ता भी बन सकता है। सौ करोड़ रुपये की शुरुआती राशि से तीन लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य बड़ा है। इसे हासिल करने के लिए सरकार, किसान, युवा और उद्योगपतियों को साथ लेकर चलना होगा। यदि यह योजना समय पर और प्रभावी ढंग से पूरी हुई, तो मध्यप्रदेश देश की आर्थिक धुरी बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा सकेगा।














