पूर्वी सिंहभूम, 21 अक्टूबर।
विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में धातुओं के गुणों तथा नई तकनीकों पर काम करने वाले वैज्ञानिकों ने अपने परिवारों के साथ सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला के एग्रिको आवासीय परिसर में दुर्गोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया। पांच दिवसीय आयोजन में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक एकजुटता की झलक देखने को मिली।
श्री श्री दुर्गा पूजा समिति की ओर से आयोजित इस महोत्सव में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, प्रतियोगिताएं और पारिवारिक गतिविधियां हुईं। वैज्ञानिकों, कर्मचारियों के परिजनों और बच्चों ने मिलकर आयोजन को यादगार बनाया। पूरे परिसर में भक्ति और उत्सव का माहौल बना रहा।
दुर्गापूजा के दौरान परिवारों ने पारंपरिक विधि-विधान से मां दुर्गा की आराधना की। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ आयोजित कार्यक्रमों में बच्चों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया और अपनी प्रतिभा व रचनात्मकता का प्रदर्शन किया।
इस आयोजन में वैज्ञानिक कार्यशैली और भारतीय सांस्कृतिक विरासत का अनूठा मेल देखने को मिला। प्रयोगशालाओं में ज्ञान, तर्क और शोध के जरिए समाज की प्रगति में योगदान देने वाले वैज्ञानिकों ने अपनी धार्मिक आस्था और परंपराओं के प्रति जुड़ाव भी प्रदर्शित किया। आयोजन के माध्यम से बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों तथा सामूहिक जीवन की परंपराओं से परिचित कराने का प्रयास किया गया।
मां दुर्गा की आराधना के साथ शक्ति, साहस, अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और सत्य की जीत का संदेश भी दिया गया। पांच दिनों तक चले इस उत्सव ने परिसर के निवासियों के बीच आपसी सहयोग और सामाजिक सौहार्द को मजबूत किया।
अगले वर्ष स्वर्ण जयंती की तैयारीइस बार का दुर्गोत्सव समिति के लिए इसलिए भी खास रहा, क्योंकि अगले वर्ष श्री श्री दुर्गा पूजा/काली पूजा समिति की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। स्वर्ण जयंती के अवसर पर समिति की पांच दशक लंबी धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक यात्रा को याद किया जाएगा। साथ ही, इस परंपरा को वर्षों से बनाए रखने में योगदान देने वाले लोगों के प्रयासों को सम्मानित करने का अवसर मिलेगा। स्वर्ण जयंती समारोह को यादगार बनाने के लिए परिसर के निवासियों में अभी से उत्साह है।
आयोजन को सफल बनाने में डॉ. संदीप घोष चौधरी, ओ. निवास राव, विल्व विशाल, डॉ. कृष्ण कुमार, राजीव श्रीवास्तव, सुब्रमण्यम, डॉ. अंजनी साहू, सरोज कुमार, अभिषेक कुमार, देव प्रकाश सिंह, पी.पी. पॉल, नवीन शर्मा, डॉ. बीना कुमारी, डॉ. पुरुषोत्तम कुमार और डी.पी. साहू सहित अन्य सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।














