नई दिल्ली, 22 अक्टूबर।
भारत और पोलैंड ने रक्षा, अंतरिक्ष तथा परमाणु ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पोलैंड की कंपनियों को भारत के साथ मिलकर इन क्षेत्रों में तकनीक विकसित करने और उत्पादन करने की साझेदारी का आमंत्रण दिया है।
प्रधानमंत्री मोदी और पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के बीच गुरुवार को दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता हुई। बैठक के बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से प्रेस वक्तव्य जारी किया। मोदी ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने के नए अवसर मिले हैं।
पोलैंड के प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए मोदी ने वर्ष 2024 में अपनी पोलैंड यात्रा का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया था। इसके बाद पिछले दो वर्षों में आपसी सहयोग को नई गति मिली है। भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था ने भी साझेदारी के विस्तार की संभावनाओं को मजबूत किया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और पोलैंड के रिश्ते केवल कूटनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच मानवीय संवेदनाओं और साझा विरासत का गहरा संबंध है। द्वितीय विश्व युद्ध के समय जामनगर और कोल्हापुर के राजपरिवारों ने पोलैंड के हजारों बच्चों और परिवारों को भारत में शरण दी थी। उन्होंने सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच संपर्क को दोनों देशों की मित्रता का महत्वपूर्ण आधार बताया।
मोदी ने पोलैंड में संस्कृत के अध्ययन और भारतविद्या की पुरानी परंपरा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि क्राकोव शहर में भारतीय अध्ययन पीठ की स्थापना दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक प्रयास है।
उन्होंने कहा कि भारत और पोलैंड लोकतांत्रिक मूल्यों तथा कानून के शासन में विश्वास रखते हैं। दोनों देश मानते हैं कि वैश्विक शासन संस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उनमें सुधार आवश्यक है।
यूक्रेन और पश्चिम एशिया की परिस्थितियों पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत शांति स्थापित करने की दिशा में होने वाले प्रत्येक सार्थक प्रयास का समर्थन करता रहेगा।














