देहरादून, 22 अक्टूबर।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी दल अपनी चुनावी पराजय का ठीकरा संवैधानिक संस्थाओं पर फोड़ता है और जनमत का सम्मान नहीं करता। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हार और जीत दोनों को सहजता से स्वीकार कर मतदाताओं के फैसले को शिरोधार्य किया जाना चाहिए। बलवीर रोड स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में मीडिया से संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की अगुवाई में एक व्यापक जन-अभियान चलाया जाएगा। यह अभियान दो चरणों में आयोजित होगा, जिसका प्रथम चरण बाइस अक्टूबर से पांच नवंबर तक और द्वितीय चरण ग्यारह से तीस नवंबर तक संचालित होगा। इसके अंतर्गत इकतीस अक्टूबर को श्रीनगर गढ़वाल, दो नवंबर को देहरादून तथा तीन नवंबर को रुद्रपुर में विशाल पदयात्राएं निकाली जाएंगी, जिसके बाद राज्य के सभी तेरह जिलों में भी यह क्रम जारी रहेगा।
मुख्यमंत्री के अनुसार दो नवंबर को राजधानी देहरादून में प्रस्तावित पदयात्रा में दस हजार से अधिक नागरिकों के भाग लेने की संभावना है। इस अभियान के जरिए केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं, देश की प्रगतिशील नीतियों और युवाओं, महिलाओं, गरीबों तथा सैनिकों के हित में लिए गए ऐतिहासिक निर्णयों से जनता को अवगत कराया जाएगा। धामी ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों द्वारा चुनावी असफलताओं के बाद ईवीएम और निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने की प्रवृत्ति पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र किसी एक दल की विजय की गारंटी नहीं देता, बल्कि इसमें अंतिम निर्णय जनता जनार्दन का होता है।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित विवादों पर मुख्यमंत्री ने अपने व्यक्तिगत जीवन का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने साझा किया कि उनका जन्म पिथौरागढ़ में हुआ, शिक्षा खटीमा में पूर्ण हुई और वे चंपावत से विधायक चुने गए, जबकि वर्तमान में देहरादून में निवास करने के बाद भी उनका वोटर कार्ड खटीमा में ही पंजीकृत है। उन्होंने कहा कि दो स्थानों पर दर्ज नामों को हटाकर एक स्थान पर सही पंजीकरण रखने में किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए, ठीक उसी प्रकार जैसे विवाह के बाद दूसरे शहर में बसने वाली महिला का नाम नए स्थान पर दर्ज होता है।
विपक्ष को आत्ममंथन की सलाह देते हुए धामी ने ओडिशा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों का उदाहरण दिया, जहाँ कांग्रेस लंबे समय से सत्ता से बाहर है। उन्होंने कहा कि केवल हाथ में संविधान की प्रति लेकर चलने से नहीं, बल्कि उसकी मर्यादाओं के अनुसार आचरण करने से संविधान का वास्तविक सम्मान होता है। आगामी विधानसभा चुनावों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि युवा केवल बातों से नहीं बल्कि ठोस परिणामों से प्रभावित होते हैं। सरकार अपने पांच वर्षों के कार्यकाल की उपलब्धियों, विकास कार्यों और सेवा भाव के रिपोर्ट कार्ड को लेकर जनता की अदालत में जाएगी।














