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संपादकीय
22 Oct, 2026

विपक्ष की नई करवट, तीसरे मोर्चे की आहट: इंडिया ब्लॉक के भीतर बेचैनी क्यों?

तमिलनाडु की डीएमके द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर अलग राजनीतिक मंच तलाशने के संकेतों के बीच, विपक्षी इंडिया ब्लॉक के भीतर तीसरे मोर्चे की सुगबुगाहट तेज हो गई है।

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर।

देश की विपक्षी राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस की अगुवाई वाले इंडिया ब्लॉक के सामने एक नई चुनौती उभरती दिख रही है। तमिलनाडु की द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) अब कांग्रेस के साथ अपने पुराने रिश्तों को दोहराने के बजाय राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग राजनीतिक मंच की संभावनाएं तलाश रही है। यह घटनाक्रम केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे देश की विपक्षी एकजुटता पर पड़ सकता है।

पिछले कुछ समय से डीएमके के सांसदों और नेताओं की सक्रियता बढ़ी है। शिवसेना (उद्धव ठाकरे), एनसीपी (शरदचंद्र पवार) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) जैसे दलों के नेताओं से मुलाकातें इस बात का संकेत हैं कि विपक्ष के भीतर एक समानांतर सोच पनप रही है। यह सोच भाजपा का विरोध तो करती है, लेकिन कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर पूरी तरह सहज नहीं है।

डीएमके और कांग्रेस के रिश्तों में दरार की बड़ी वजह तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक समीकरण हैं। मई में कांग्रेस द्वारा अभिनेता विजय की तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) को समर्थन देने की चर्चा के बाद से डीएमके सतर्क हो गई है। कांग्रेस का एक वर्ग मानता है कि तमिलनाडु में नए विकल्प तलाशे जाने चाहिए, जबकि डीएमके इसे अपने गढ़ में हस्तक्षेप के रूप में देखती है।

इसी पृष्ठभूमि में डीएमके ने केंद्र सरकार का विरोध जारी रखते हुए कांग्रेस से अलग होकर तीसरा मोर्चा बनाने की दिशा में कदम बढ़ाने के संकेत दिए हैं। यह केवल रणनीति नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी है कि क्षेत्रीय दल अब राष्ट्रीय राजनीति में केवल कनिष्ठ सहयोगी बनकर नहीं रहना चाहते।

कांग्रेस के लिए यह स्थिति दोहरी चुनौती पैदा करती है। पहली चुनौती डीएमके की पहल है, जबकि दूसरी विपक्षी राजनीति में अपने नेतृत्व को स्वीकार्य बनाए रखने की है। यदि क्षेत्रीय दल कांग्रेस से अलग साझा मंच बनाने लगते हैं, तो संसद में समन्वय, चुनावी गठबंधन और केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्ष की एकजुटता कमजोर हो सकती है।

कांग्रेस को अपने सहयोगियों को साथ बनाए रखने के लिए अधिक लचीला होना पड़ेगा। पिछले लोकसभा चुनाव में इंडिया ब्लॉक ने जिस तरह एकजुटता दिखाई थी, वह अब धीरे-धीरे ढीली पड़ती दिख रही है। यदि डीएमके जैसा मजबूत दल अलग राह पकड़ता है, तो अन्य क्षेत्रीय दलों को भी नया विकल्प मिल सकता है।

तीसरे मोर्चे की चर्चा भारतीय राजनीति में नई नहीं है। पहले भी कई बार ऐसे प्रयोग हुए हैं, लेकिन हर बार नेतृत्व, प्रधानमंत्री पद के चेहरे और भाजपा के खिलाफ साझा रणनीति को लेकर सवाल उठे हैं। इस बार भी तीसरे मोर्चे के सामने वही चुनौतियां हैं। बीजेडी, आम आदमी पार्टी और वाईएसआर कांग्रेस जैसे दल डीएमके के साथ खड़े हो सकते हैं, लेकिन क्षेत्रीय दलों को साथ लाना और लंबे समय तक एकजुट रखना आसान नहीं है। हर दल की अपनी महत्वाकांक्षा, जनाधार और राज्यस्तरीय मजबूरियां हैं। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर साझा मंच बनाना और उसे प्रभावी ढंग से चलाना बड़ी चुनौती होगी।

आज क्षेत्रीय दल केवल अपने राज्यों तक सीमित नहीं रहना चाहते। वे राष्ट्रीय नीतियों में भी अपनी भूमिका चाहते हैं। डीएमके की पहल इसी नई आकांक्षा का प्रतीक है। क्षेत्रीय दल चाहते हैं कि गठबंधन में फैसले एकतरफा न हों, बल्कि सामूहिक सहमति से लिए जाएं और सभी की आवाज बराबरी से सुनी जाए।

विपक्ष में बिखराव का सीधा लाभ भाजपा को मिल सकता है। यदि विपक्ष दो धड़ों में बंटता है, तो भाजपा विरोधी मतों के विभाजन से सत्तारूढ़ दल को फायदा हो सकता है। हालांकि, यदि तीसरा मोर्चा मजबूत होता है, तो वह उन राज्यों में भाजपा को चुनौती दे सकता है, जहां कांग्रेस कमजोर और क्षेत्रीय दल मजबूत हैं।

तमिलनाडु से करवट लेती राष्ट्रीय सियासत बताती है कि विपक्षी राजनीति एक नए मोड़ पर है। कांग्रेस के लिए यह आत्ममंथन का समय है। उसे सहयोगियों को भरोसा दिलाना होगा कि गठबंधन में सभी की भूमिका महत्वपूर्ण है और नेतृत्व थोपा नहीं जाएगा, बल्कि साझा सहमति से तय होगा। वहीं, डीएमके जैसे दलों को भी विचार करना होगा कि अलग मंच बनाने से भाजपा के खिलाफ लड़ाई मजबूत होगी या विपक्ष और कमजोर होगा।

किसी भी लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष जरूरी है। विपक्ष जितना एकजुट और रचनात्मक होगा, सरकार उतनी ही जवाबदेह बनेगी। तीसरे मोर्चे की चर्चा विपक्ष में नई सोच और क्षेत्रीय दलों की बढ़ती आकांक्षाओं का संकेत है। आने वाले विधानसभा चुनाव और उसके बाद लोकसभा चुनाव की तैयारियां तय करेंगी कि तीसरा मोर्चा केवल अटकल बनकर रह जाता है या वास्तव में एक नई राजनीतिक धारा के रूप में उभरता है।

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