देहरादून, 22 अक्टूबर।
उत्तराखंड में मदरसों की धार्मिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि नए पाठ्यक्रम में हिंसा, नफरत और कट्टरवाद को बढ़ावा देने वाली सामग्री शामिल नहीं होगी। सरकार का उद्देश्य ऐसी युवा पीढ़ी तैयार करना है, जो प्रेम, आपसी सद्भाव और राष्ट्रसेवा के मूल्यों को अपनाए।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार पहले ही मदरसों में शुक्रवार के स्थान पर रविवार को साप्ताहिक अवकाश देने का फैसला कर चुकी है। इसके बाद मदरसा बोर्ड की जगह उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया। अब पंजीकृत मदरसों में निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुसार हिंदी, गणित, विज्ञान और अंग्रेजी की पढ़ाई अनिवार्य है। धार्मिक शिक्षा के लिए भी नए मानक तय किए गए हैं।
धामी ने कहा कि राज्य में मदरसा बोर्ड समाप्त होने के बाद गठित अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के नियमों का पालन करना सभी मदरसों के लिए जरूरी है। मान्यता प्राप्त करने के लिए प्राधिकरण और उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा बोर्ड से निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी। मदरसों में पढ़ाए जाने वाले विषयों और धार्मिक शिक्षा की सामग्री के लिए भी पाठ्यक्रम निर्धारित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि देवभूमि में तैयार होने वाली नई पीढ़ी समाज में प्रेम और सद्भाव को बढ़ावा देने के साथ राष्ट्रसेवा में भी योगदान दे।
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष प्रो. सुरजीत सिंह गांधी ने बताया कि इस्लाम की धार्मिक शिक्षा का पाठ्यक्रम विशेषज्ञ विद्वानों की मदद से तैयार किया गया है। इसमें नफरत, हिंसा, कट्टरता और वैमनस्य को बढ़ावा देने वाली सामग्री के लिए जगह नहीं रखी गई है। उन्होंने बताया कि इस्लाम के साथ सिख, बौद्ध और जैन धर्मों की शिक्षा के लिए भी नए पाठ्यक्रम तैयार किए गए हैं।
अल्पसंख्यक विभाग के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने कहा कि मदरसों में धार्मिक शिक्षा का उद्देश्य समाज में भाईचारे और आपसी सद्भाव को मजबूत करना होना चाहिए। शिक्षा के माध्यम से नफरत या हिंसा को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप विद्वानों के सहयोग से नया पाठ्यक्रम तैयार कराया गया है।
सरकार ने मदरसों की मान्यता के लिए शिक्षा विभाग और अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के नियमों का पालन अनिवार्य कर दिया है। अधिकारियों के अनुसार, मान्यता की शर्तें पूरी नहीं करने वाले कई मदरसों की गतिविधियां बंद हो चुकी हैं।














