भोपाल, 28 सितंबर।
मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून अब धीरे-धीरे अपनी विदाई की ओर कदम बढ़ा रहा है, और आगामी चार दिनों के दौरान राज्य के किसी भी हिस्से में भारी से अति भारी बारिश की कोई संभावना नहीं है, जबकि मंगलवार से उज्जैन, इंदौर और ग्वालियर-चंबल संभागों में तेज धूप खिलने की पूरी उम्मीद है तथा आने वाले एक सप्ताह के भीतर ही पूरे प्रदेश से मानसून की आधिकारिक विदाई शुरू होने के आसार जताए जा रहे हैं, क्योंकि रविवार तक के आंकड़ों के मुताबिक पूरे राज्य में औसतन 37.7 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है जो कि सामान्य कोटे का 95.8 प्रतिशत है और अब महज 0.2 प्रतिशत और पानी गिरने पर पूरा प्रदेश सामान्य बारिश के कोटे में शामिल हो जाएगा, जबकि मौसम विभाग का यह अनुमान है कि अगले तीन दिनों के दौरान हल्की फुल्की बारिश होने से भी यह लक्ष्य पूरा हो सकता है।
इससे पहले राज्य के पूर्वी हिस्सों में गहरे अवदाब (डिप्रेशन) के सक्रिय रहने के कारण लगभग 48 घंटों तक मूसलाधार और भारी बारिश का दौर लगातार जारी रहा था, जिसकी वजह से कई नदियां उफान पर आ गईं और जलस्तर बढ़ने के कारण कई बड़े बांधों के गेट खोलने पड़े थे, हालांकि रविवार से मौसम का यह सिस्टम कमजोर पड़ गया जिससे भारी बारिश का सिलसिला थम गया और भोपाल, इंदौर तथा जबलपुर समेत तमाम जिलों में दिनभर धूप-छांव का खेल चलता रहा, तथा आज सोमवार से किसी भी प्रभावी वेदर सिस्टम के सक्रिय न होने के चलते राज्य के ज्यादातर इलाकों में मौसम पूरी तरह साफ रहने और तेज धूप निकलने की संभावना है, और मौसम विभाग के अनुसार आने वाले कुछ दिनों में प्रदेश के आधे से अधिक हिस्से में धूप का असर काफी तेज हो जाएगा जिसके साथ ही मानसून की वापसी की प्रक्रिया भी जोर पकड़ लेगी, हालांकि बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो पूर्वी मध्य प्रदेश में इस सीजन औसत से अधिक पानी गिरा है जहाँ जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभागों में सामान्य से लगभग चार प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की जा चुकी है और अधिकांश जिलों में कोटे की भरपाई हो चुकी है, हालांकि पूर्वी क्षेत्र के ही कुछ जिलों जैसे बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य के मुकाबले 2 से 20 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज हुई है।
दूसरी तरफ पश्चिमी मध्य प्रदेश में इस बार मानसून की स्थिति अपेक्षाकृत थोड़ी कमजोर रही है, जहाँ आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा जैसे जिलों में सामान्य से 9 से 51 प्रतिशत तक कम वर्षा आंकी गई है, जिसका सीधा अर्थ यह है कि भले ही समूचे प्रदेश का कुल औसत सामान्य के बेहद करीब पहुंच गया हो, लेकिन जिलों के हिसाब से बारिश का वितरण बेहद असमान रहा है, क्योंकि एक तरफ जहाँ पूर्वी अंचल के अनेक जिलों में जरूरत से ज्यादा पानी बरसा है वहीं पश्चिमी क्षेत्र के कई जिले अभी भी औसत आंकड़े से पीछे चल रहे हैं, हालांकि अनूपपुर, छतरपुर, डिंडौरी, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में औसत से अधिक बारिश रिकॉर्ड की जा चुकी है, जिससे कुल आंकड़ा सामान्य के पास पहुंच गया है, फिर भी मौसम विभाग के मौजूदा पूर्वानुमान के संकेत यही हैं कि इस बार प्रदेश में शत-प्रतिशत (100 प्रतिशत) सामान्य बारिश का कुल आंकड़ा पार होने की संभावना काफी कम है।














