उज्जैन, 08 अक्टूबर।
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार तड़के भगवान महाकाल की भस्म आरती विशेष श्रृंगार के साथ संपन्न हुई। सुबह 4 बजे मंदिर के कपाट खुलने के बाद गर्भगृह में विराजित देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके बाद बाबा महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और फलों के रस से पंचामृत अभिषेक हुआ। प्रथम घंटाल के बाद हरिओम का जल अर्पित किया गया और मंत्रोच्चार के बीच पूजा संपन्न हुई। कपूर आरती के बाद भगवान महाकाल के मस्तक पर रजत चंद्र, भांग और चंदन लगाया गया तथा त्रिपुंड धारण कराया गया। गुलाब सहित सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित करने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढककर भस्म अर्पित की गई। भस्म आरती के पश्चात बाबा महाकाल का राजा स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया गया, जिसमें रजत मुकुट, रजत चंद्र, आभूषण, पुष्प और ड्रायफ्रूट से सजावट की गई।
भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला और सुगंधित पुष्प अर्पित किए गए। इसके बाद फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया। भस्म आरती की परंपरा के तहत महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म अर्पित की गई। मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। विशेष श्रृंगार में सजे बाबा के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आरती में शामिल हुए। दर्शन के बाद भक्तों ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान में अपनी मनोकामना कही। इस दौरान मंदिर परिसर लगातार बाबा महाकाल के जयकारों से गूंजता रहा और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।














