नई दिल्ली, 08 अक्टूबर।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान पर आतंकवाद के मुद्दे पर ‘दोहरी नीति’ अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर के बारे में सूचना देने पर इनाम की घोषणा करना उसके आतंकवाद समर्थक रवैये पर पर्दा डालने की कोशिश है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में राइट ऑफ रिप्लाई के दौरान भारत ने कहा कि दुनिया 9/11, 26/11 और पहलगाम जैसे आतंकवादी हमलों को नहीं भूली है। भारत के प्रथम सचिव रघू पुरी ने कहा कि केवल घोषणाओं से आतंकवाद को खत्म नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके लिए आतंकियों, उनके वित्तपोषकों और समर्थकों के खिलाफ ठोस कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने पाकिस्तान के उस दावे पर भी सवाल उठाया कि मसूद अजहर अफगानिस्तान में छिपा हुआ है। पुरी ने कहा कि तालिबान सरकार इस दावे को खारिज कर चुकी है और पाकिस्तान की ओर से अजहर के बारे में सूचना देने के लिए सात लाख रुपये के नए इनाम की घोषणा को उन्होंने महज एक ‘दिखावा’ करार दिया।
भारत ने कहा कि आतंकवादियों को सुरक्षित पनाह उपलब्ध कराना पीड़ितों को न्याय से वंचित करने के साथ-साथ आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को भी कमजोर करता है। पुरी ने प्रमुख आतंकी हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि आतंकवाद के अपराधियों और उन्हें संरक्षण देने वालों के खिलाफ कार्रवाई किए बिना इस चुनौती का प्रभावी समाधान संभव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा और भारत के खिलाफ जारी आतंकवाद के गंभीर परिणाम होंगे। भारत ने पाकिस्तान से आतंकवाद को लेकर अपने रवैये में स्पष्टता और जवाबदेही दिखाने की मांग करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने उसके दावों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाया।














