काठमांडू, 08 अक्टूबर।
तंजानिया के अरुशा में आयोजित अंतर-संसदीय संघ (आईपीयू) की 153वीं महासभा में नेपाल की ओर से पेश जलवायुजनित आपदाओं से निपटने संबंधी आपातकालीन प्रस्ताव को दो-तिहाई से अधिक बहुमत के साथ मंजूरी मिल गई। नेपाली संसद के स्पीकर डोल प्रसाद (डीपी) अर्याल द्वारा प्रस्तुत ‘हिमालयी क्षेत्र तथा अन्य जोखिमपूर्ण क्षेत्रों में जलवायु संबंधी आपदाओं से निपटने और लचीलापन मजबूत करने के लिए तत्काल संसदीय कदम’ शीर्षक वाले प्रस्ताव के पक्ष में 901 वोट पड़े, जबकि 78 वोट विरोध में और 140 वोट तटस्थ रहे। आईपीयू के नियम 11(ख) के तहत कई प्रस्ताव आवश्यक बहुमत हासिल करने पर सबसे अधिक सकारात्मक मत पाने वाले प्रस्ताव को आपातकालीन एजेंडे में शामिल किया जाता है। इसी प्रक्रिया में नेपाल का प्रस्ताव चुना गया। अर्याल ने हिमालय को मानवता की साझा विरासत और एशिया का ‘वाटर टावर’ बताते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन से हिमालय, ग्लेशियरों और हिमतालों पर बढ़ता खतरा व्यापक मानव सभ्यता के लिए गंभीर चुनौती है। उन्होंने नेपाल में हाल में आई जलवायुजनित आपदाओं का उल्लेख करते हुए जलवायु न्याय और संसदीय जवाबदेही के लिए देशों की संसदों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
प्रस्ताव में सदस्य देशों के बीच जलवायु और मौसम संबंधी सीमापार पूर्व चेतावनी प्रणालियों तथा आवश्यक तकनीक तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कानूनी ढांचा विकसित करने की जरूरत बताई गई है। साथ ही जलवायु संबंधी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को लागू कराने के लिए संबंधित देशों की कार्यपालिका को संसदीय स्तर पर जवाबदेह बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया है। अर्याल ने कहा कि प्रस्ताव का पारित होना केवल नेपाल की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आईपीयू के सभी सदस्य देशों और सांसदों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने जलवायु आपदाओं से प्रभावित लोगों की सुरक्षा, न्याय और सुरक्षित भविष्य के लिए दोषारोपण के बजाय सामूहिक समाधान विकसित करने का आह्वान किया। अब आईपीयू की 153वीं महासभा के आपातकालीन एजेंडे में नेपाल के प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा होगी, जिसमें जलवायुजनित आपदाओं, हिमालय और ग्लेशियरों के संरक्षण, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व चेतावनी व्यवस्था, तकनीकी व वित्तीय सहयोग तथा संवेदनशील क्षेत्रों में लचीलापन बढ़ाने के लिए संसदीय पहलों पर विचार किया जाएगा।













