अखिल भारतीय संत समिति के महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने 1 नवंबर की प्रस्तावित कांग्रेस रैली के समय पर सवाल उठाते हुए त्योहारों के दौरान छोटे कारोबारियों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका जताई।
नई दिल्ली, 22 अक्टूबर।
अखिल भारतीय संत समिति के महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कांग्रेस की 1 नवंबर को प्रस्तावित रैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि हिंदू त्योहारों के आसपास आंदोलन आयोजित करने से व्यापारिक गतिविधियां और छोटे कारोबारियों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि धनतेरस और दीपावली से पहले बाजारों में खरीदारी बढ़ने के दौरान ऐसे आयोजनों के समय पर विचार किया जाना चाहिए।
गुरुवार को संस्कृति संसद के आयोजन से जुड़े कार्यक्रम के दौरान बातचीत में स्वामी जितेंद्रानंद ने कहा कि त्योहारों के समय छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी लगाने वालों और गरीब परिवारों के लिए कारोबार के अवसर बढ़ते हैं। उनके अनुसार, इस दौरान विरोध प्रदर्शन होने से व्यापार और रोजगार पर असर पड़ने की आशंका रहती है।त्योहारों में कारोबार प्रभावित होने की आशंकास्वामी जितेंद्रानंद ने कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुमान का हवाला देते हुए कहा कि पिछले वर्ष त्योहारों के दौरान देश में करीब 6.05 लाख करोड़ रुपये की खरीदारी हुई थी। उन्होंने दावा किया कि इस बार यह कारोबार सात लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।उन्होंने सवाल उठाया कि ईद, बकरीद और क्रिसमस जैसे त्योहारों के दौरान ऐसे आंदोलनों का आयोजन क्यों नहीं होता और हिंदू त्योहारों के आसपास ही विरोध प्रदर्शन क्यों प्रस्तावित किए जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे हिंदू त्योहारों और उनसे जुड़े व्यापारिक आयोजनों पर असर पड़ सकता है।रामलीला मेलों में छोटे कारोबारियों की आजीविका का मुद्दास्वामी जितेंद्रानंद ने 10 अक्टूबर को प्रस्तावित आंदोलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय पितृ विसर्जन और दिल्ली में रामलीला मेलों के आयोजन की तैयारियां चल रही थीं। उनके अनुसार, रामलीला मेलों में बड़ी संख्या में छोटे कारोबारी खाद्य पदार्थों और अन्य सामान के स्टॉल लगाकर आजीविका कमाते हैं।उन्होंने केंद्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सराहना करते हुए कहा कि दिल्ली में दशहरा और अन्य त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए।एक नवंबर की रैली को लेकर उठाए सवालस्वामी जितेंद्रानंद ने दावा किया कि सीजेपी ने निजी मुचलके से जुड़े मामले में पीछे हटने का फैसला किया, जबकि कांग्रेस की ओर से मुचलका नहीं भरा गया है और पार्टी अब भी 1 नवंबर की रैली की बात कर रही है।उन्होंने आरोप लगाया कि विभिन्न आंदोलनों से त्योहारों और उनसे जुड़े व्यापारिक आयोजनों पर असर डालने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, ये आरोप स्वामी जितेंद्रानंद की ओर से लगाए गए हैं।