नई दिल्ली, 22 अक्टूबर।
नेहा बोरा के निजी मुचलके से जुड़े मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। अदालत शुक्रवार को इस मामले में आदेश सुनाएगी। सुनवाई के दौरान नेहा की छवि, उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले अधिकारों को लेकर अहम टिप्पणियां हुईं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि नेहा बोरा को पहले ही ‘बैड बॉय’ की तरह पेश कर दिया गया है और अब उनसे अच्छे व्यवहार का वादा करने को कहा जा रहा है। इस पर सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने सवाल उठाया कि छह प्राथमिकी का सामना कर रहे व्यक्ति को क्या पूरी तरह निर्दोष माना जा सकता है।
छवि और अनुच्छेद 21 पर अदालत की टिप्पणी
चेतन शर्मा ने दलील दी कि विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी करने से पहले मामले पर विचार किया था। इसके लिए सामान्य डायरी की प्रविष्टियों, पहले दर्ज प्राथमिकी, अपराध संबंधी रिकॉर्ड और उस समय सड़कों पर बने हालात को आधार बनाया गया था। उन्होंने कहा कि मजिस्ट्रेट ने जांच अधिकारी को बुलाकर मामले की जानकारी भी ली थी।
इस पर अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति से अच्छे व्यवहार का वादा मांगने से यह धारणा बन सकती है कि उसका व्यवहार पहले ठीक नहीं था। पीठ ने इस टिप्पणी को व्यक्ति की छवि और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले अधिकारों से जोड़कर देखा।
कथित सत्ता परिवर्तन वाली बैठक का जिक्र
सरकार की ओर से चेतन शर्मा ने दावा किया कि नेहा बोरा ने सीजेपी के नेताओं और प्रशांत भूषण के साथ एक संयुक्त बैठक में हिस्सा लिया था। उनके अनुसार, बैठक में कथित तौर पर कहा गया था कि यह सत्ता परिवर्तन की लड़ाई है और सत्ता परिवर्तन कराकर रहेंगे।
वहीं, नेहा बोरा के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन की बात करना गलत नहीं है। उनके मुताबिक, नेहा ने केवल मंडी हाउस में लोगों से जुटने की अपील की थी और हिंसा करने या कानून तोड़ने का आह्वान नहीं किया था।
10 हजार रुपये के निजी मुचलके को दी चुनौती
नेहा बोरा ने विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के उस नोटिस को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी है, जिसमें शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का निजी मुचलका भरने और एक जमानतदार देने को कहा गया है। उनकी याचिका में इस कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब शुक्रवार को आने वाले आदेश पर नजर रहेगी।














