वाराणसी, 22 अक्टूबर।
तमिलनाडु और उत्तर भारत के बीच सांस्कृतिक, शैक्षणिक और आध्यात्मिक संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से पांचवें काशी तमिल संगमम का आयोजन 28 नवंबर से 12 दिसंबर 2026 तक किया जाएगा। इस आयोजन में तमिलनाडु से करीब 1,400 प्रतिभागी शामिल होंगे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने काशी तमिल संगमम 5.0 के लिए पंजीकरण पोर्टल का शुभारंभ किया।
इस वर्ष संगमम की विषयवस्तु ‘तिरुक्कुरल पयिलोवोम, तिरुक्कुरल अभ्यास करें’ रखी गई है। इसके माध्यम से प्राचीन तमिल ग्रंथ तिरुक्कुरल में निहित नैतिक और मानवीय मूल्यों को देशभर के युवाओं और विद्यार्थियों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
तिरुक्कुरल की शिक्षाओं से परिचित होंगे युवा
कार्यक्रम के दौरान तिरुक्कुरल की जीवनोपयोगी शिक्षाओं को समझाने के लिए शैक्षणिक गतिविधियां, विभिन्न भाषाओं में अध्ययन सामग्री और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य युवाओं को इस प्राचीन ग्रंथ में दिए गए मूल्यों को समझने और दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
आयोजकों के अनुसार, इस बार युवाओं और विद्यार्थियों की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है। उन्हें तमिल साहित्य, भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराओं और साझा सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।
वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या जाएंगे प्रतिभागी
संगमम के तहत तमिलनाडु से आने वाले करीब 1,400 प्रतिभागियों को सात समूहों में विभाजित किया जाएगा। प्रत्येक समूह के लिए आठ दिवसीय यात्रा निर्धारित की गई है, जिसमें चार दिन यात्रा और चार दिन विभिन्न स्थलों के भ्रमण तथा निर्धारित गतिविधियों के लिए रखे जाएंगे।
प्रतिभागी वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या का दौरा करेंगे। इन शहरों में उनके लिए सांस्कृतिक, शैक्षणिक, आध्यात्मिक और अन्य विषयों से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा
काशी तमिल संगमम का उद्देश्य तमिलनाडु और काशी के बीच ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना है। इसके साथ ही भारतीय भाषाओं, साहित्य और विविध ज्ञान परंपराओं के बीच संवाद को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।
इस आयोजन के जरिए विद्यार्थियों और युवाओं को सांस्कृतिक विरासत से मिलने वाली सीख को अपने शैक्षणिक, व्यावसायिक और सामाजिक जीवन में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।














