ढाका, 23 अक्टूबर।
बांग्लादेश की अलग-अलग जेलों में वर्तमान समय में 15 देशों के लगभग 407 नागरिक निरुद्ध हैं। इनमें से 172 कैदी ऐसे हैं जिनकी सजा की अवधि समाप्त हो चुकी है या वे रिहा किए जाने के योग्य हैं, परंतु अपने देशों से हरी झंडी न मिलने तथा वतन वापसी की कानूनी औपचारिकताएं पूरी न होने की वजह से अब भी सलाखों के पीछे रहने को मजबूर हैं। इन विदेशी बंदियों में सबसे बड़ी तादाद भारत और म्यांमार के नागरिकों की पाई गई है।
जेल प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक कुल 407 विदेशी बंदियों में से 44 को अदालत द्वारा दोषी करार दिया जा चुका है, वहीं 191 विचाराधीन कैदी की श्रेणी में आते हैं। सजायाफ्ता कैदियों में से किसी को भी मृत्युदंड नहीं मिला है। बांग्लादेशी कारागारों में सर्वाधिक 238 भारतीय नागरिक कैद हैं। इनमें से 168 भारतीय अपनी निर्धारित सजा पूरी कर चुके हैं, किंतु स्वदेश वापसी की कागजी प्रक्रिया अटकी होने से उनकी रिहाई संभव नहीं हो सकी है।
इस फेहरिस्त में म्यांमार दूसरे स्थान पर आता है, जिसके कुल 133 नागरिक वहां की जेलों में निरुद्ध हैं। इनमें म्यांमार के 33 बंदियों को सजा सुनाई जा चुकी है और केवल एक नागरिक अपनी वतन वापसी का इंतजार कर रहा है। अन्य मुल्कों के कैदियों में नाइजीरिया के छह, पाकिस्तान व मलेशिया के तीन-तीन, तंजानिया और पेरू के दो-दो नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा जॉर्जिया, बहामास, बेलारूस, गुयाना, कांगो, इथियोपिया एवं थाईलैंड का एक-एक व्यक्ति जेल में बंद है।
कारागार अधिकारियों के अनुसार इन विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी मादक पदार्थों की तस्करी, स्वर्ण तस्करी, वित्तीय धोखाधड़ी, अमेरिकी डॉलर के गैर-कानूनी लेनदेन, पासपोर्ट फर्जीवाड़े, अवैध वीओआईपी कारोबार तथा मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों में की गई थी।
जेल महकमे के अधिकारी मसूद हसन ज्वेल के अनुसार संबंधित देशों की ओर से आवश्यक अनापत्ति पत्र न मिलने की वजह से इन विदेशियों की वतन वापसी नहीं हो पा रही है। कारागार प्रशासन इस मसले से गृह मंत्रालय को निरंतर अवगत करा रहा है। विदेशी कैदियों का विवरण ढाका स्थित संबंधित देशों के दूतावासों को प्रेषित किया गया है। विदेश मंत्रालय के जरिए भी पत्राचार हुआ है, किंतु अभी तक अपेक्षित सकारात्मक उत्तर नहीं मिला है। भारतीय नागरिकों की पहचान स्थापित करना और उनकी वापसी कराना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग के कांसुलर विंग के अधिकारी के अनुसार 25 ऐसे भारतीय नागरिकों की पहचान की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है, जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है और वे भारत लौटने की प्रतीक्षा में हैं।
भारतीय मिशन ने बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय से इन कैदियों की रवानगी की प्रक्रिया में तेजी लाने और संभावित वापसी की तारीखों का विवरण अग्रिम रूप से देने का आग्रह किया है, जिससे भारतीय अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर आवश्यक बंदोबस्त किए जा सकें।
अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय ने 121 ऐसे अन्य बंदियों की सूची भी प्रदान की है, जिनके भारतीय होने और सजा पूरी करने का दावा किया जा रहा है। यद्यपि, इनमें से अधिकतर मामलों में उपलब्ध जानकारियां उनकी भारतीय नागरिकता सिद्ध करने के लिए अपर्याप्त हैं।
भारतीय दूतावास ने ऐसे कैदियों तक राजनयिक पहुंच प्रदान करने की मांग उठाई है, जिनकी नागरिकता का सत्यापन करने के लिए अतिरिक्त विवरण की दरकार है। कुछ प्रकरणों में पर्याप्त आंकड़े मौजूद हैं, किंतु नागरिकता पुष्टीकरण की प्रक्रिया अभी जारी है और उच्चायोग विदेश मंत्रालय के जवाब की प्रतीक्षा कर रहा है।
म्यांमार के नागरिकों की वापसी के संबंध में प्रतिक्रिया प्राप्त करने हेतु वहां के दूतावास से कई दफा ईमेल के जरिए संपर्क साधने का प्रयास किया गया, परंतु कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ।
जेल प्रशासन का मानना है कि सजा की अवधि समाप्त होने के उपरांत भी विदेशी नागरिकों को लंबी अवधि तक निरुद्ध रखने से प्रशासनिक परेशानियां बढ़ रही हैं। इससे जेलों पर अतिरिक्त वित्तीय भार भी पड़ रहा है। सुरक्षा मानकों के कारण विदेशी बंदियों को पृथक कोठरियों में रखा जाता है तथा उनके वार्डों की निगरानी सीसीटीवी कैमरों द्वारा की जाती है।
बांग्लादेशी कारागारों में विदेशी नागरिकों की मौजूदगी का विषय हाल ही में 4 सितंबर को तब दोबारा सुर्खियों में आया, जब कॉक्स बाजार स्थित एक होटल से छह चीनी नागरिकों को ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले में पकड़ा गया। इससे पूर्व जनवरी महीने में ढाका पुलिस की साइबर इकाई ने इसी तरह के आरोपों में आठ लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें पांच चीनी नागरिक शामिल थे।













