जयपुर, 23 अक्टूबर।
श्री दादू दयाल महासभा के कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उनका इस्तेमाल करने के मामले में मोती डूंगरी थाना पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि महासभा की बैठक की फर्जी कार्यवाही तैयार कर सदस्यों के जाली हस्ताक्षर किए गए और दस्तावेज रजिस्ट्रार कार्यालय में पेश कर प्रमाण पत्र हासिल किया गया। शुक्रवार को अदालत ने आरोपितों की जमानत अर्जी खारिज करते हुए उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया।जयपुर, लालसोट और इंदौर के निवासी गिरफ्तार
डीसीपी ईस्ट रंजिता शर्मा के अनुसार, गिरफ्तार आरोपितों में कुलदीप स्वामी (45), निवासी एएसजीएम नगर, रीको कांटा, सांगानेर; मुकेश कुमार स्वामी (52), निवासी छोटी जमात, वार्ड नंबर 6, लालसोट और मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी नरेंद्र पंथी (56) शामिल हैं।
पुलिस ने तीनों को दो दिन पहले अदालत में पेश किया था, जहां से उन्हें एक दिन का पुलिस रिमांड मिला था। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद शुक्रवार को दोबारा अदालत में पेश किया गया। इसके बाद उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेजने का आदेश दिया गया।
बैठक की फर्जी कार्यवाही तैयार करने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि आरोपितों ने अन्य लोगों के साथ मिलकर 30 जुलाई 2025 को श्री दादू दयाल महासभा, मोती डूंगरी, जयपुर की बैठक होना दर्शाया। इसके बाद बैठक की कथित फर्जी कार्यवाही विवरणिका तैयार की गई और उस पर महासभा के सदस्यों सहित अन्य लोगों के जाली हस्ताक्षर किए गए।
आरोप है कि इन दस्तावेजों को संस्था की वास्तविक कार्यवाही बताकर रजिस्ट्रार कार्यालय में प्रस्तुत किया गया। इसके आधार पर कार्यालय को गुमराह कर प्रमाण पत्र प्राप्त किया गया। दस्तावेजों में अविश्वास प्रस्ताव से संबंधित विवरण शामिल होने की बात भी सामने आई है।
हस्ताक्षर रजिस्टर की प्रति से जुड़ा मामला
थानाधिकारी मोहन सिंह के अनुसार, शिकायत में बताया गया कि 3 नवंबर 2025 को नरैना धाम में महंत गोपालदास महाराज के निर्वाण दिवस पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा के दौरान हस्ताक्षर रजिस्टर की फोटोकॉपी कराई गई थी। आरोप है कि बाद में 30 जुलाई 2025 की तारीख दर्शाकर महासभा की बैठक की कथित फर्जी कार्यवाही तैयार की गई और रजिस्ट्रार कार्यालय में पेश की गई।
शिकायतकर्ता पक्ष ने महासभा को ऐतिहासिक, सामाजिक और धार्मिक संस्था बताते हुए आरोप लगाया कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल संस्था की बड़ी अचल संपत्तियों से जुड़े मामलों में किया गया। पुलिस अब दस्तावेजों की सत्यता और कथित फर्जीवाड़े में अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।














