भोपाल, 24 अक्टूबर।
हिंदी लेखिका संघ, मध्य प्रदेश की ओर से छंद, मात्रा, गीत एवं नवगीत लेखन पर केंद्रित कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें साहित्यकारों और रचनाकारों ने काव्य-सृजन की तकनीकी बारीकियों, मात्रा गणना और छंद विधान के व्यावहारिक पक्षों की जानकारी प्राप्त की।
कार्यशाला के प्रथम सत्र में उज्जैन से आए अशोक रक्ताले, कमलेश श्रीवास्तव और हरिओम श्रीवास्तव ने विभिन्न छंदों की विशेषताओं पर मार्गदर्शन दिया। दूसरे सत्र में डॉ. रामवल्लभ आचार्य और जबलपुर के संजीव वर्मा ‘सलिल’ ने गीत-नवगीत की रचना प्रक्रिया पर विचार रखे।
अशोक रक्ताले ने मात्रिक और वर्णिक छंदों की जानकारी देते हुए ‘यमाताराजभानसलगा’ सूत्र से वर्णिक छंदों के गण समझाए। कमलेश श्रीवास्तव ने नवगीत की प्रासंगिकता बताते हुए कहा कि नवगीत कम शब्दों में गहरी बात कहने की क्षमता रखता है। हरिओम श्रीवास्तव ने उदाहरणों के माध्यम से कुंडलिया छंद की विशेषताओं और रचना प्रक्रिया को समझाया।
डॉ. रामवल्लभ आचार्य ने गीत में लय और छंद के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि छंद के बिना गीत की कल्पना नहीं की जा सकती। संजीव वर्मा ‘सलिल’ ने रचनाकारों को मौलिक प्रयोग करने और अपनी विशिष्ट पहचान बनाने के लिए प्रेरित किया।
संस्था की अध्यक्ष डॉ. साधना गंगराड़े ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य रचनाकारों को छंद के व्यावहारिक पक्षों से परिचित कराना है। इसमें 50 से अधिक प्रतिभागियों ने सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. रंजना शर्मा के स्वस्ति वाचन और मधुलिका सक्सेना की सरस्वती वंदना से हुआ। प्रथम सत्र का संचालन डॉ. वर्षा चौबे ने किया, जबकि महिमा वर्मा श्रीवास्तव ने आभार व्यक्त किया।














