पटना, 24 अक्टूबर।
बिहार में औद्योगिक विकास को गति देने और निवेश आकर्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में शनिवार को गयाजी में राज्य के उद्योग विभाग और 12 औद्योगिक इकाइयों के बीच 4,092 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों से संबंधित समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इन प्रस्तावों के क्रियान्वयन से राज्य में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
निवेश प्रस्तावों में ऊर्जा, वस्त्र उद्योग, ऑर्गेनिक उत्पाद, ऑटोमोबाइल, एल्युमिनियम, कृषि आधारित उत्पाद और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
मिंट लाइफ साइंसेज करेगी 1,500 करोड़ रुपये का निवेश
निवेश प्रस्तावों में मिंट लाइफ साइंसेज ने सबसे अधिक 1,500 करोड़ रुपये लगाने का प्रस्ताव दिया है। एबीआईएस ग्रुप ने 600 करोड़ रुपये, बायोहील एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड ने 510 करोड़ रुपये और जियोफास्ट इंडस्ट्रीज (1) लिमिटेड ने 500 करोड़ रुपये के निवेश के लिए समझौता किया है।
अन्य प्रस्तावों में कुमार ऑर्गेनिक्स के 300 करोड़ रुपये, जियाना इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के 206 करोड़ रुपये, नालंदा ऑटोमेक प्राइवेट लिमिटेड के 120 करोड़ रुपये और अमरनाथ टेक्सटाइल के 110 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है।
इसके अलावा मां भद्रकाली एल्युमिनियम एक्सट्रूजन प्राइवेट लिमिटेड ने 95 करोड़ रुपये, शिवा एग्रो नेचुरल प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने 51 करोड़ रुपये, वास्तु विहार बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड ने 50 करोड़ रुपये और कनकलया ज्वेलरी ने 50 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है।
रोजगार और लघु उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा
राज्य सरकार के अनुसार, प्रस्तावित निवेश से औद्योगिक उत्पादन बढ़ने के साथ सहायक और लघु उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिल सकता है। नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
सरकार निवेश के अनुकूल माहौल तैयार करने, उद्यमियों को प्रोत्साहित करने और औद्योगिक क्षेत्रों में आधारभूत संरचना विकसित करने पर जोर दे रही है। समझौता ज्ञापनों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने के लिए उद्योग विभाग निवेशकों के साथ समन्वय करेगा।
सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के धरातल पर उतरने से बिहार में औद्योगिकीकरण को गति मिलेगी और राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।














