नई दिल्ली, 26 अक्टूबर।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार सुबह महर्षि वाल्मीकि को नमन करते हुए उनकी जयंती पर देशवासियों को बधाई दी। उन्होंने महर्षि के विचारों को भारतीय संस्कृति और विरासत का महत्वपूर्ण आधार बताया। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर सुभाषितम् के माध्यम से माता सीता से जुड़े एक प्रसंग का श्लोक भी साझा किया।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि महर्षि वाल्मीकि के सद्विचार हर युग में देश का मार्गदर्शन करते रहेंगे। मानवता के लिए उनके अमूल्य संदेश भारतीय समाज को निरंतर प्रेरित करते हैं। उन्होंने कामना की कि महर्षि के विचारों से देश की संस्कृति और परंपराएं आगे भी समृद्ध होती रहें।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने महाकवि कालिदास के महाकाव्य रघुवंशम् के 14वें सर्ग का 70वां श्लोक साझा किया। यह श्लोक माता सीता और महर्षि वाल्मीकि से जुड़े प्रसंग का वर्णन करता है। इसमें सीता के वन में अकेले रह जाने और महर्षि वाल्मीकि के उनके पास पहुंचने का उल्लेख है।
मान्यता के अनुसार, जब लक्ष्मण माता सीता को वन में छोड़कर चले जाते हैं, तब महर्षि वाल्मीकि उन्हें अपने आश्रम में आश्रय देते हैं। बाद में वे लव और कुश को रामकथा का गायन भी सिखाते हैं। साझा किए गए श्लोक का भाव इसी प्रसंग से जुड़ा है और इसमें महर्षि वाल्मीकि के आगमन तथा शोक से श्लोक की उत्पत्ति की कथा का संकेत मिलता है।
महर्षि वाल्मीकि को आदिकवि माना जाता है। उनकी रचना रामायण भारतीय साहित्य और सांस्कृतिक परंपरा की महत्वपूर्ण धरोहर है। प्रधानमंत्री का संदेश जयंती के अवसर पर उनके विचारों, साहित्यिक योगदान और मानवीय मूल्यों की प्रासंगिकता को रेखांकित करता है।














