जबलपुर, 26 अक्टूबर।
विश्व प्रसिद्ध भेड़ाघाट की संगमरमरी वादियों में आयोजित 23वें नर्मदा महोत्सव का रविवार रात समापन हुआ। शरद पूर्णिमा की दूधिया चांदनी के बीच आयोजित सांस्कृतिक संध्या में शास्त्रीय नृत्य, भजन, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और सुरीले गीतों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। दो दिवसीय आयोजन के अंतिम दिन बड़ी संख्या में कला प्रेमी पहुंचे।
कार्यक्रम में मुंबई की इंडियन आइडल प्रतिभागी अरुणिता कांजीलाल और सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका ऋचा शर्मा की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण रहीं। सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत नर्मदा पूजन के बाद त्रिभंग कला अकादमी, जबलपुर की कौतुकी उपाध्याय की कथक शैली में शिव स्तुति से हुई। इसके बाद महाराष्ट्र की शिवमुद्रा संस्था के कलाकारों ने ढोल-ताशा की ऊर्जावान प्रस्तुति दी। महाराष्ट्र के ये पारंपरिक वाद्ययंत्र दशहरा, नवरात्रि, गुड़ी पड़वा और अन्य धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों में बजाए जाते हैं।
समापन समारोह की मुख्य अतिथि राज्यसभा सदस्य सुमित्रा वाल्मीकि रहीं। विधायक नीरज सिंह की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में विधायक सुशील तिवारी इंदू, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, जबलपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष संदीप जैन, नगर निगम अध्यक्ष रिकुंज विज, विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष प्रशांत केशरवानी, भेड़ाघाट नगर परिषद अध्यक्ष चतुर सिंह, उपाध्यक्ष जगदीश दाहिया, भाजपा जिला ग्रामीण अध्यक्ष राजकुमार पटेल, जबलपुर महानगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर और महामंत्री पंकज दुबे मौजूद रहे।
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में सहभागिता की और शरद पूर्णिमा की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने नर्मदा महोत्सव को सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि 23 वर्षों से लगातार आयोजित हो रहे इस उत्सव को अधिक भव्य और यादगार बनाने के साथ पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास जारी रहेंगे, ताकि नर्मदा तट की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत अधिक लोगों तक पहुंचे।
राज्यसभा सदस्य सुमित्रा वाल्मीकि ने कहा कि शरद पूर्णिमा की रात मां नर्मदा की लहरों और प्राकृतिक छटा का आनंद लेना आध्यात्मिक अनुभूति देता है। उन्होंने भेड़ाघाट की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता का उल्लेख करते हुए चौसठ योगिनी मंदिर तथा पुराने संसद भवन से जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि राज्यसभा में पहली बार जाने पर पुराने संसद भवन की स्थापत्य कला के बारे में जानने की उत्सुकता हुई। अध्ययन के दौरान चौसठ योगिनी मंदिर और पुराने संसद भवन के स्तंभों की संरचना में समानता की जानकारी मिली।
उन्होंने मां नर्मदा के प्रति राकेश सिंह की श्रद्धा और जबलपुर के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की। उनके अनुसार, राकेश सिंह का अनुभव, समर्पण और दूरदर्शिता शहर के विकास में महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने गौतम ऋषि, मां गंगा, इंद्र और अहिल्या से जुड़ी पौराणिक कथा का उल्लेख करते हुए धार्मिक परंपराओं में उचित समय और मर्यादा के महत्व पर जोर दिया। गौरीघाट और तिलवारा घाट पर देर रात श्रद्धालुओं को नदी में उतरते देखकर होने वाली पीड़ा साझा करते हुए उन्होंने सभी से मां नर्मदा के प्रति श्रद्धा और धार्मिक मर्यादाओं का सम्मान करने का आग्रह किया।
विधायक नीरज सिंह ने कहा कि शरद पूर्णिमा पर मां नर्मदा, सुरसरिता और संगमरमर की चट्टानों से सजे भेड़ाघाट में आयोजित होने वाले इस महोत्सव का विशेष महत्व है। वर्ष 2004 में तत्कालीन सांसद और वर्तमान लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह की पहल से शुरू हुआ यह आयोजन 23 वर्षों में महत्वपूर्ण सांस्कृतिक मंच बन गया है। यहां देश-विदेश के कलाकारों ने अपनी प्रतिभा दिखाई है और स्थानीय कलाकारों को भी अपनी कला प्रदर्शित कर पहचान बनाने का अवसर मिला है।
अरुणिता कांजीलाल की प्रस्तुति का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार था। इंडियन आइडल के 12वें सत्र में प्रथम उपविजेता रहीं अरुणिता ने महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र ‘आई गिरि नंदिनी’ से गायन शुरू किया। इसके बाद उन्होंने ‘राम सियाराम, सियाराम जय जय राम’ भजन प्रस्तुत किया। उनकी मधुर आवाज में भक्ति गीतों के साथ फिल्मी और गैर फिल्मी गीतों ने भी श्रोताओं का मन मोह लिया।
अरुणिता ने ‘नैना मोरे तरस गए, आजा बलम परदेसिया’ और ‘हीरे मोती मैं न चाहूं, मैं तो चाहूं संगम तेरा’ जैसे गीत गाए। शास्त्रीय शैली में ठुमरी ‘जा-जा रे अपने मंदिरवा, सुन पावे सास ननदिया’ और ‘रंगी सारी गुलाबी चुनरिया रे, मोहे मारे नजरिया सांवरिया रे’ की प्रस्तुति भी सराही गई।
उन्होंने मां नर्मदा को समर्पित ‘मां रेवा थारो पानी निर्मल, खल-खल बहतो जायो रे’ और भगवान शिव से जुड़ा ‘कौन है वो, कौन है वो, कहां से है आया’ गीत प्रस्तुत किया। ‘हेरी सखी मंगल गावो री, धरती अंबर सजावो री, आज मेरे पिया घर आवेंगे’ और ‘एक राधा-एक मीरा, दोनों ने श्याम को चाहा’ ने भी दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। अंतिम प्रस्तुति में ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ गाकर उन्होंने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
सांस्कृतिक संध्या की अंतिम प्रस्तुति मुंबई की पार्श्व गायिका ऋचा शर्मा ने दी। उन्होंने ‘सोनिया वे रांझणा वे’ से गायन की शुरुआत की। इसके बाद ‘जिंदगी में कभी कोई आए न रब्बा’ और ‘माही वे’ सहित अन्य गीतों से दर्शकों का मनोरंजन किया। उनकी प्रस्तुतियों के दौरान श्रोताओं में खासा उत्साह देखने को मिला।
देर रात तक चले महोत्सव में रंग-बिरंगी आतिशबाजी भी आकर्षण का केंद्र रही। पहले दिन की तुलना में रविवार को अधिक संख्या में कला प्रेमी भेड़ाघाट पहुंचे और उन्होंने भजनों, लोक प्रस्तुतियों तथा संगीत का आनंद लिया।














