सैन फ्रांसिस्को, 26 अक्टूबर।
सैमसंग के स्मार्ट टीवी में उपयोगकर्ताओं की गतिविधियों पर नजर रखने और विज्ञापनों को उनकी पसंद के अनुसार दिखाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस्तेमाल का आरोप लगा है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और बग खोजने वाले एक शोधकर्ता ने टीवी के ऑपरेटिंग सिस्टम की जांच के दौरान ऐसे कोड मिलने का दावा किया है, जो आवाज से जुड़ी जानकारी, स्क्रीनशॉट और उपयोग संबंधी आंकड़े एकत्र कर सकते हैं।
शोधकर्ता के अनुसार, वर्ष 2025 के सैमसंग टीवी पर बेहद सटीक और व्यक्तिगत विज्ञापन दिखाई देने के बाद उन्हें संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने टीवी में इस्तेमाल होने वाले टाइजेन ऑपरेटिंग सिस्टम की तकनीकी जांच शुरू की। इस दौरान उन्हें उपयोगकर्ता की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटाने और विज्ञापनों को लक्षित करने से संबंधित कई व्यवस्थाएं मिलीं।
जांच में नेटवर्क के माध्यम से भेजे जाने वाले आंकड़ों, आवाज की श्रेणी पहचानने, स्क्रीनशॉट लेने और अलग-अलग उपकरणों पर उपयोगकर्ता की पहचान जोड़ने से संबंधित कोड मिलने का दावा किया गया। शोधकर्ता ने यह भी आशंका जताई कि टीवी पर चलने वाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उपयोगकर्ता की गतिविधियों का विश्लेषण करने वाली प्रक्रियाओं के कारण उपकरण की गति धीमी हो सकती है।
शोधकर्ता के मुताबिक, टीवी में ऐसा कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल भी मिला, जो यह समझने में मदद कर सकता है कि उपयोगकर्ता कौन-से वीडियो देखता है, किन विज्ञापनों को छोड़ देता है और वीडियो को कहां तक देखता है। उन्होंने दावा किया कि माइक्रोफोन नहीं होने वाले टीवी भी आवाज दर्ज करने के लिए जुड़े हुए माइक्रोफोन वाले उपकरणों, जैसे साउंडबार या ब्लूटूथ उपकरण, की तलाश कर सकते हैं।
हगिंग फेस के इंजीनियर एनजीएक्ससन ने भी माइक्रोफोन से जुड़ी इस गतिविधि की जांच करने की बात कही। उन्होंने बताया कि परीक्षण के दौरान टीवी ने पांच सेकंड के लिए माइक्रोफोन सक्रिय किया और फिर बंद कर दिया। इसके बाद कई घंटे तक दोबारा ऐसी गतिविधि नहीं दिखी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका टीवी पहले से ही रूट किया हुआ था और उसकी कई सेटिंग बंद थीं, इसलिए सामान्य स्थिति में टीवी का व्यवहार अलग हो सकता है।
इस जांच के दौरान शोधकर्ता ने टीवी की तकनीकी पड़ताल के लिए ओपनएआई के उपकरणों का इस्तेमाल किया था। बाद में उन्हें साइबर दुरुपयोग के आरोप में खाता प्रतिबंधित किए जाने का ईमेल मिला। शोधकर्ता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि उन्होंने इन उपकरणों का इस्तेमाल कमजोरियां खोजने या उनका फायदा उठाने के लिए नहीं, बल्कि अपने उपकरण पर स्थानीय स्तर पर तकनीकी विश्लेषण करने के लिए किया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रतिबंध संभवतः स्वचालित पहचान प्रणाली की गलती से लगा।
सैमसंग और टाइजेन के अलावा अन्य कंपनियों के स्मार्ट टीवी की गोपनीयता को लेकर भी पहले आरोप सामने आ चुके हैं। एलजी जैसे ब्रांडों पर भी ग्राहकों की गतिविधियों पर नजर रखने के आरोप लगे हैं। कई उपयोगकर्ताओं ने बिना किसी नए फीचर या भारी अनुप्रयोग के टीवी धीमा होने की शिकायत की है। कुछ लोग इसकी वजह अनावश्यक सॉफ्टवेयर को मानते हैं, हालांकि शोधकर्ता ने संभावना जताई कि पृष्ठभूमि में चलने वाली गतिविधियां भी इसका कारण हो सकती हैं।
शोधकर्ता ने अपने निष्कर्षों पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने की बात कही है। अपनी पोस्टों के अंत में उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि आखिरकार उन्हें ऐसी कंपनी मिल गई, जो वास्तव में अपने ग्राहकों की बातें सुनती है।














