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संपादकीय
26 Oct, 2026

मोदी ने जामवंत की तरह भारत को उपद्रवियों से बचाया

वैश्विक उथल-पुथल और आंतरिक चुनौतियों के बीच देश में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने की रणनीतिक पहल।

नई दिल्ली, 26 अक्टूबर।

बांग्लादेश, नेपाल और फ्रांस की तरह भारत में भी हिंसा भड़काकर आपदा की स्थिति उत्पन्न कर सत्ता परिवर्तन करने की चाहत रखने वालों की मंशा को धराशायी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जामवंत की तरह भारत को बचा लिया है। भारत के ऊपर भी दुनिया के अन्य देशों की तरह भारी खतरा मंडरा रहा था, लेकिन भारत सतर्क हो गया है। मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने बड़ी चतुराई से इनके नेक्सस को तोड़ दिया है। हैरानी की बात है कि भारत की राजनीति में अर्बन नक्सल गैंग और टुकड़े-टुकड़े गैंग की असफलता के बाद अब एक नया नाम, रिजीम चेंज गैंग, सामने आया है, जिसने जबरन सत्ता परिवर्तन की आग भड़काने के लिए अपनी सारी शक्तियां लगा दी हैं। हालांकि, इस गैंग में शामिल विपक्षी दलों के कुछ नेताओं और कुछ गिने-चुने शिक्षित लोगों को भली-भांति पता है कि वे आगामी चुनावों में भी जीत नहीं सकते, इसलिए वे अब दूसरे देशों की असुर शक्तियों की मदद से हिंसा फैलाकर नरेंद्र मोदी की सरकार को सत्ता से हटाने का सपना देख रहे हैं। निस्संदेह, पूरे गैंग के मन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए कूट-कूटकर नफरत भरी हुई है। वर्ष 2014 से ही यह टुकड़े-टुकड़े गैंग मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में देखना नहीं चाहता है। उन्हें लगता है कि एक साधारण चाय बेचने वाले का बेटा देश का प्रधानमंत्री कैसे बन गया?

ये देश के वे दुश्मन हैं, जो रिजीम चेंज गैंग के जरिए भारत में चुनाव करवाए बिना सत्ता हासिल करना चाहते हैं। 6 अक्टूबर से कांग्रेस समेत अलग-अलग गैंग भारत में चुनाव आयोग के खिलाफ विभिन्न तरह के प्रदर्शन करके आंदोलन को हिंसक बनाने की पुरजोर कोशिश कर रहे थे, लेकिन हमारी पुलिस और सुरक्षा बलों ने इनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट पर भी भरपूर दबाव बनाने का प्रयास किया कि वह चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कार्रवाई करे और एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है, तो बिना सुनवाई के कोई आदेश नहीं दिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस देकर जवाब मांगा है।

बांग्लादेश और नेपाल की तरह यूरोप के कई देशों, जैसे फ्रांस और अल्बानिया में हिंसक आंदोलनों से अस्थिरता का माहौल उत्पन्न करने वाली जिहादी मानसिकता के लोगों को यह भली-भांति पता है कि भारत जैसे विकासशील और विराट लोकतांत्रिक देश में धक्केशाही से उथल-पुथल मचाना कतई संभव नहीं है, क्योंकि यहां की करोड़ों जनता मोदी के हर कदम के साथ है। लोगों के दिलो-दिमाग में यह बात बैठी हुई है कि विपक्षी दलों के नेताओं के कारनामे देशहित में नहीं हैं और इसलिए वे कहीं भी सरकार बनाने में कामयाब नहीं हो सकते। इसके बाद मोदी के मंत्रियों में गृहमंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल एवं पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मोर्चा संभाला और विपक्षी तांडव की हवा निकाल दी।

जंतर-मंतर पर अब प्रदर्शन प्रतिबंधित हो गया है। इसके बदले दिल्ली में तीन अन्य जगहें दी गई हैं, लेकिन इस बीच टुकड़े-टुकड़े गैंग वालों की मंशा अब देश के सामने आ गई है कि वे येन-केन-प्रकारेण जबरन सत्ता हथियाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। इस बीच, देश के चुनाव आयुक्त पर वोट चोरी का झूठा आरोप लगाने वाली कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट ने जबरदस्त झटका दिया है और प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को नोटिस देकर जवाब मांगा है कि वे सबूतों के साथ यह सिद्ध करें कि उनके आरोपों में दम है। लेकिन आज तक राहुल गांधी कोई सबूत लेकर नहीं आए हैं।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में 6 अक्टूबर को सभी विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के खिलाफ जमकर प्रदर्शन कर झूठा नैरेटिव प्रस्तुत करने की नाकाम कोशिश की। वहीं, 10 और 11 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन को दिल्ली पुलिस ने असफल कर दिया।

राहुल गांधी के राजनीतिक गुरु सैम पित्रोदा, प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव और सीपीआई(एम) के छात्र संगठन का नेतृत्व कर रहीं नेता बोरा ने खुलकर अपनी मंशा स्पष्ट कर दी कि वे भारत में रिजीम चेंज करना चाहते हैं। उनका कहना है कि भारत में बांग्लादेश, नेपाल और अरब देशों की तरह अस्थिरता फैलाकर नरेंद्र मोदी की सत्ता बदलेंगे। योगेंद्र यादव का यह कहना कि अब देश में निर्णय संसद से नहीं, सड़क से होगा। नीट पेपर लीक मामले में 20 जुलाई 2026 को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेने के बाद सीजेपी का हौसला बुलंद हो गया और उसका मन सातवें आसमान पर पहुंच गया। लेकिन धीरे-धीरे सीजेपी की पोल खुल गई कि यह आम आदमी पार्टी का चट्टा-बट्टा है और विदेशी फंडिंग लेकर सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रही है। इस बात की पुष्टि अमेरिका केी एक मशहूर सिंगर के बयान से हुई, जिसमें उन्होंने दावा किया कि भारत में अस्थिरता फैलाने के लिए अमेरिका से फंडिंग हुई है और देश-विदेश के प्रमुख अखबारों ने सिंगर की इस बात को प्रकाशित किया है।

इस बीच, मध्यप्रदेश कांग्रेस के एक बड़बोले नेता सज्जन सिंह वर्मा दो कदम आगे बढ़कर राहुल गांधी को खुश करने के लिए कह गए कि भारत की स्थिति बांग्लादेश जैसी हो जाएगी और लोग प्रधानमंत्री निवास में घुसकर उन्हें सत्ता से बाहर कर देंगे। वहीं, राहुल गांधी ने अपने गोवा कार्यक्रम में यह कहकर सनसनी फैला दी कि मोदी और शाह से तो हम निपट लेंगे, लेकिन उसके बाद वे वहीं से वियतनाम रवाना हो गए, जबकि देश में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दलों के नेता दिन-रात परिश्रम कर रहे हैं। ऐसे में जनता यह पूछे बिना कैसे रह सकती है कि राहुल गांधी वियतनाम क्या करने गए हैं और किससे मिलने गए हैं? जबकि कांग्रेस पार्टी की तरफ से भी कोई जानकारी नहीं दी गई कि प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी वियतनाम क्यों गए हैं।

वहीं, दूसरी तरफ विजयादशमी के दिन आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से सतर्क रहने का आह्वान किया कि देश को बांटने वालों को सबक सिखाने का समय आ गया है। वहीं, 21 अक्टूबर को सौरव दास और रांका की जमानत अर्जियों पर हाईकोर्ट ने जबरदस्त फटकार लगाते हुए कहा कि आप कौन हैं और आपके आंदोलन का मकसद क्या है? आप देश में अशांति क्यों फैलाना चाहते हैं? हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि जब आपकी उम्र 27 और 31 वर्ष है, तो आप अपने आपको जेन-जी कैसे मानते हैं? कोर्ट ने यह भी कहा कि भारत में रिजीम चेंज केवल चुनाव से संभव है, अराजकता से नहीं।

-दिलीप झा

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