भोपाल, 26 अक्टूबर।
मध्यप्रदेश पुलिस ने युवाओं को कानून की जानकारी देने के लिए एक नई पहल शुरू की है। उच्च शिक्षा विभाग और पुलिस शाखा के सहयोग से महाविद्यालयों में जन सुरक्षा युवा सुजन संवाद अभियान चलाया जा रहा है। राष्ट्रीय एकता दिवस के उपलक्ष्य में शुरू हुआ यह अभियान 31 अक्टूबर तक चलेगा।
इसका उद्देश्य युवाओं को कानून, महिला सुरक्षा, साइबर अपराध और नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना है। पहले पुलिस का मतलब थाने का भय और वर्दी का रौब माना जाता था। अब पुलिस को मित्र के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश हो रही है। यह सोच में बदलाव का संकेत है।
अभियान की खास बात इसका व्यावहारिक तरीका है। विद्यार्थियों को कार्यशालाओं के साथ थानों का भ्रमण कराया जाएगा, ताकि वे पुलिस की कार्यप्रणाली समझ सकें। डायल 112 पर सूचना मिलने के बाद पुलिस के घटनास्थल तक पहुंचने और कार्रवाई करने की प्रक्रिया भी बताई जाएगी। इससे युवाओं को आपात स्थिति में पुलिस सेवाओं का सही इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी।
महाविद्यालयों में मानवाधिकार, महिला एवं बाल सुरक्षा, जेंडर आधारित हिंसा की रोकथाम, साइबर अपराध से बचाव, नशे से दूरी और यातायात सुरक्षा जैसे विषयों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इस पहल का उद्देश्य युवाओं को केवल कानून की जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें अपनी और समाज की सुरक्षा में सक्रिय भागीदार बनाना है। अक्सर साइबर अपराध का शिकार होने के बाद भी युवा शर्म या डर के कारण पुलिस के पास नहीं जाते। ऐसे में पुलिस का सीधे संवाद करना भरोसा कायम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
हालांकि, चुनौती यह है कि अभियान केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए। युवाओं की भाषा में संवाद और नियमित जागरूकता जरूरी है। इसे 31 अक्टूबर के बाद भी जारी रखना चाहिए। यदि यह पहल ईमानदारी से आगे बढ़ी, तो युवा पुलिस से डरने के बजाय मदद के लिए उसके पास आएंगे। यही जन सुरक्षा का वास्तविक अर्थ है।













