Naidunia Live
• टॉप न्यूज़ • मध्य प्रदेश • विज्ञान व प्रौद्योगिकी • अपराध • शिक्षा • संपादकीय • धर्म / अध्यात्म • वीडियो स्टोरी • मौसम • त्योहार • प्रेरक कहानियाँ
• वीडियो • न्यूज़ आर्काइव
संपादकीय
26 Oct, 2026

श्मशान में बंधक लाश और 2.1 लाख की बोली, यही है हमारा नया भारत?

तमिलनाडु के तेनकाशी जिले में 85 वर्षीय बुजुर्ग के अंतिम संस्कार के लिए कथित तौर पर 2.10 लाख रुपये मांगने और पुलिस की भूमिका पर उठे सवालों ने जातिगत भेदभाव तथा संवैधानिक अधिकारों की स्थिति पर बहस छेड़ दी है।

तेनकाशी, 26 अक्टूबर।

तमिलनाडु के तेनकाशी जिले के संबवरवडाकरै कस्बे से आई खबर पढ़कर हाथ कांपते हैं और कलम में स्याही की जगह खून उतर आता है। 85 वर्षीय के. वी. रामराज की मृत्यु हो जाती है। घर में शव पड़ा है, बेटे-बहू रो रहे हैं, लेकिन अंतिम संस्कार के लिए श्मशान ले जाने की अनुमति नहीं मिलती। आरोप है कि जाति पंचायत श्मशान के गेट पर खड़ी होकर कहती है कि पहले 2 लाख 10 हजार रुपये लाओ, फिर अंतिम संस्कार करने देंगे। आखिरकार सामाजिक बहिष्कार झेल रहा परिवार पैसे देता है, तब जाकर पिता की चिता जलती है। आजादी के 75 साल बाद भी यदि किसी शव के अंतिम संस्कार के लिए फिरौती देनी पड़े, तो यह हमारी सामाजिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल है।

इस घटना में सबसे शर्मनाक सवाल पुलिस की भूमिका पर है। परिवार का आरोप है कि पुलिस के पास जाने पर उसे जुर्माना देकर मामला निपटाने की सलाह दी गई। यदि ऐसा हुआ है, तो यह कानून के शासन की गंभीर विफलता है। जिस पुलिस का दायित्व कमजोर की रक्षा करना है, वही यदि जाति पंचायत के दबाव में काम करे, तो जनता न्याय की उम्मीद किससे करेगी? ऐसे मामलों में दोषी पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। पुलिस की वर्दी का सम्मान तभी कायम रह सकता है, जब वह कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई करे।

क्या जाति पंचायतें संविधान से बड़ी हो गई हैं? संविधान का अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता का उन्मूलन करता है, अनुच्छेद 21 गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार देता है और अनुच्छेद 15 जाति के आधार पर भेदभाव का निषेध करता है। फिर किस कानून ने कुछ लोगों को यह अधिकार दिया कि वे तय करें कि कौन किससे बात करेगा और किसका अंतिम संस्कार कहां होगा? यदि परिवार को केवल विघ्नेश के परिवार से बातचीत करने के कारण बहिष्कार झेलना पड़ा, तो यह सामाजिक उत्पीड़न का गंभीर उदाहरण है। पंचायत के नाम पर किसी नागरिक की स्वतंत्रता और गरिमा छीनने का अधिकार किसी को नहीं है।

हर साल 15 अगस्त को हम देशभक्ति के गीत गाते हैं और अंग्रेजों से मिली आजादी पर गर्व करते हैं, लेकिन गांवों में जातिगत भेदभाव कायम रहे, तो आजादी के अर्थ पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हम चंद्रयान तक पहुंच गए, लेकिन यदि किसी को अपने ही गांव के श्मशान तक पहुंचने के लिए संघर्ष करना पड़े, तो यह विकास के दावों पर तमाचा है। विश्वगुरु बनने का सपना तभी सार्थक होगा, जब हर नागरिक को समान अधिकार और सम्मान मिले।

अब केवल सामाजिक समरसता के उपदेश पर्याप्त नहीं हैं। सामाजिक बहिष्कार, श्मशान, पानी, रास्ते और मंदिरों तक पहुंच रोकने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जरूरी है। इसके लिए प्रभावी कानून, निष्पक्ष जांच और दोषियों को दंडित करने की व्यवस्था होनी चाहिए। महाराष्ट्र में 2016 में सामाजिक बहिष्कार के विरुद्ध कानून बनाया गया था। ऐसे प्रयासों से सीख लेकर देशभर में प्रभावी कानूनी संरक्षण सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

सरकार को तय करना होगा कि इस देश में बाबा साहेब आंबेडकर का संविधान चलेगा या जाति पंचायतों के मनमाने फरमान। दोनों एक साथ नहीं चल सकते। यदि ऐसी घटनाओं पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो अगली बार श्मशान के बाहर केवल किसी व्यक्ति का शव नहीं, बल्कि लोकतंत्र की विश्वसनीयता भी सवालों के घेरे में होगी।

|
वीडियो फीचर

एशियन पैरा गेम्स 2026 में निरंजन मुकुंदन ने जीता कांस्य पदक, भारत का बढ़ाया गौरव


एशियन पैरा गेम्स में भारत का डबल धमाका, प्रवीण को गोल्ड तो बंटी को सिल्वर

बरगलाने वालों, देश का युवा जागरूक है! 🇮🇳 | कांग्रेस और CJP पर सवाल

एम्स भोपाल की 2 युवा शोधकर्ता स्पेन में करेंगी भारत का नाम रोशन, कुष्ठ रोग पर पेश करेंगी शोध

मानसिक स्वास्थ्य पर जागरूकता कार्यक्रम: तनावमुक्त जीवन का संदेश | मानसरोवर ग्लोबल यूनिवर्सिटी

मंत्री प्रहलाद पटेल और राधा सिंह ने सुनीं कार्यकर्ताओं की समस्याएं, समाधान के दिए निर्देश #mpnews

आज का राशिफल

मित्तव्ययता रखें क्योंकि रुपये-पैसों की सुविधा आगे मिले न मिले। व्यापार में स्थिति नरम रहेगी। संतोष रखने से सफलता मिलेगी। जीवनसाथी का परामर्श लाभदायक रहेगा। समय नकारात्मक परिणाम देने वाला बना रहेगा। बचते-बचते कलह विवाद का डर बना रहेगा। शुभांक-4-5-7

आज का मौसम

भोपाल

17° / 33°

Sunny

ट्रेंडिंग न्यूज़