जयपुर, 26 अक्टूबर।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि सेवा का उद्देश्य केवल जरूरतमंदों को सुविधाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उनमें आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता और आगे बढ़ने का विश्वास पैदा करना भी है। सेवा का वास्तविक लक्ष्य यह होना चाहिए कि आज सहायता प्राप्त करने वाले लोग भविष्य में दूसरों की मदद करने में सक्षम बनें। उन्होंने समाज के सक्षम लोगों से सेवा बस्तियों में जाकर प्रत्यक्ष रूप से योगदान देने की अपील की।
होसबाले सोमवार को सेवा भारती की जयपुर इकाई के वार्षिकोत्सव में मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि जयपुर में 257 सेवा बस्तियां चिह्नित की गई हैं। इन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन, सुरक्षा और स्वाभिमान को मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बस्तियों को अभावों के बजाय सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी के केंद्र के रूप में देखने की सोच विकसित की गई है।
उन्होंने बताया कि सेवा भारती से जुड़ी संस्थाएं देशभर में लगभग डेढ़ लाख छोटे-बड़े सेवा कार्य संचालित कर रही हैं। इनमें स्वयंसेवकों के साथ समाज के अनेक लोग भी सहयोग करते हैं। उनके अनुसार, सेवा के लिए आर्थिक सहायता देने और सीधे भागीदारी करने वाले लोगों की कमी नहीं है। जरूरत समाज में इस भावना को सक्रिय करने की है।
सेवा के साथ स्वाभिमान को भी महत्व
होसबाले ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं देना सेवा का एक हिस्सा है। इसके साथ जरूरतमंदों में यह विश्वास जगाना भी जरूरी है कि वे समाज के लिए योगदान दे सकते हैं। प्रत्येक व्यक्ति सम्मान और आत्मविश्वास के साथ जीवन जीने का अधिकारी है।
महर्षि वाल्मीकि जयंती का उल्लेख करते हुए उन्होंने भगवान राम के केवट, शबरी और गिलहरी के प्रति स्नेह का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इन प्रसंगों से समाज के प्रत्येक व्यक्ति के महत्व का संदेश मिलता है।
सेवा बस्तियों में प्रत्यक्ष भागीदारी की अपील
होसबाले ने सेवा सदन में कार्यरत सेवानिवृत्त चिकित्सकों और अन्य कार्यकर्ताओं के समर्पण का उल्लेख किया। उन्होंने एक ऐसे सेवानिवृत्त चिकित्सक का उदाहरण दिया, जो प्रतिदिन चार-पांच किलोमीटर की दूरी तय करके सेवा कार्यों में योगदान देने पहुंचते हैं। इससे सेवा के प्रति समर्पण का महत्व सामने आता है।
उन्होंने लोगों से सेवा बस्तियों के संस्कार केंद्रों में जाकर बच्चों के साथ समय बिताने और जन्मदिन व दीपावली जैसे अवसर उनके बीच मनाने का आग्रह किया। परिवारों को भी इन गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आर्थिक सहयोग के साथ व्यक्तिगत सहभागिता से सामाजिक अपनत्व बढ़ेगा और राष्ट्रीय एकता की भावना मजबूत होगी।
वेबसाइट और एप का विमोचन
कार्यक्रम में नवल पीठाधीश्वर संत मुन्ना दास जी खोडा का सान्निध्य रहा। मुख्य अतिथि के रूप में मंगलम् ग्रुप के निदेशक संजय गुप्ता तथा विशिष्ट अतिथि निखिल जैन और विजेंद्र सिंह तंवर उपस्थित रहे।
इस अवसर पर सेवा भारती की वेबसाइट और एप के साथ ‘भारतीय संस्कृति में सेवा परंपरा’ पुस्तक के विशेषांक का विमोचन किया गया। विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र स्थित यशोदा बाल सेवा केंद्र के नवनिर्मित भवन का डिजिटल उद्घाटन भी किया गया। विभिन्न सेवा बस्तियों के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए और सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों पर आधारित नाटक का मंचन किया।














