पिछले दिनों सत्ताधारी दल के एक माननीय ने अपने क्षेत्र की समस्याएं उठाते हुए अपनी ही सरकार के खिलाफ कुछ बोल दिया। अब कहीं यह बयान उन्हें भारी न पड़ जाए! इसी उठापटक के बीच माननीय चिंतन कर रहे हैं कि उनके बयानों से पार्टी और सरकार को कितना नुकसान हुआ और उन्हें अपने क्षेत्र में कितना फायदा मिला। फिलहाल फायदे में तो माननीय ही नजर आ रहे हैं।














