सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के आरोपपत्र में दर्ज तथ्यों पर 40 बिंदुओं के माध्यम से अपना पक्ष रखा। वहीं, सीबीआई की ओर से भी मामले से जुड़े तर्क प्रस्तुत किए गए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने याचिका पर फैसला सुनाने के लिए निर्णय सुरक्षित रखा।
ससुराल में मृत मिली थीं ट्विशा
सीबीआई के अनुसार, 12 मई 2026 की रात ट्विशा शर्मा अपने ससुराल में फांसी पर लटकी मिली थीं। उन्हें इलाज के लिए भोपाल स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू की थी।
सास और पति पर प्रताड़ना के आरोप
इस मामले में ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह के खिलाफ मई में भोपाल के कटारा हिल्स थाने में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। सीबीआई की जांच में आरोप लगाया गया कि दोनों दहेज की मांग को लेकर ट्विशा को मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे। इन आरोपों के संबंध में अदालत में दोनों पक्षों ने अपना पक्ष रखा है।
सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद सीबीआई को मिली जांच
25 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले में स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई की थी। इसके बाद राज्य सरकार ने प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंप दी। केंद्रीय एजेंसी ने उसी दिन प्राथमिकी दर्ज कर जांच अपने हाथ में ले ली थी। अब गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार है।














